ज़ियारते अरबईन
ज़ियारते अरबीन इस महीने की बीस तारीख को हज़रत सय्येदुश शुहादा का चेहल्लुम है। इस दिन हज़रत इमाम हुसैन (अ०) की ज़ियारत पढ़ने में बहुत सवाब है। हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ०) से रिवायत है कि मोमिन की पाचँ निशानीयाँ हैं। दिन और रात में वाजिब और नवाफिल की (51) इक्कयावन रकअत नमाज़ पढ़ना, ज़ियारत-ए-अरबीन पढ़ना, दाहिने हाथ में अगूंठी पहनना, खाक पर सिज्दः करना और बिस्मिल्लाहिर्रहमा निररहीम तेज़ आवाज़ से कहना। इमाम जअफर सादिक (अ०) से फर्माया कि सफर की बीसवीं तारीख को उस वक्त जब कि सूरज ऊँचा हो रहा हो, इमाम हुसैन (अ०) की ज़ियारत पढ़ो और कहो : "अस्सलामो अला वलीयिल्लाह व हबीबेः अस्स्लामो अला खलीलिल्लाह व नजीबेः अस्सलामो अला सफीयिल्लाहे वब्ने सफीयेः अस्सलामो अलल हुसैनिल मज़लूमिश शहीद अस्सलामो अला असीरिल करोबाते व कृतीलिल अबारात अल्लाहुम्मा इन्नी अश्हदो अन्नाहू वलीयोका वब्नो वलीयेका व सफीयोका वब्नो - सफीयेकल फाऐज़ो बे करामतेका अक्रम्ताहू बिश शहादते व हबौताहू बिस्सआदातें वज्ताबैताहू बेतीबिल विलादाते व जाअल्ताहू सय्येदम मेनस सादाते काऐदम मेनल कादाते व ज़ाऐदम मेनज़ ज़ादाते व अअतैताहू मवारीसल अनाबियाऐ...