विलादते हज़रते फ़ातेमातुज़ ज़हरा सअ का मुख़्तसर तअर्रुफ़
✅विलादते हज़रते फ़ातेमातुज़ ज़हरा सअ एक रोज़ हज़रत रसूले अकरम सलल्लाहो अलैहे व आलेहि वसल्लम मकामे अबतह में हज़रत अमीरूल मोमेनीन अलैहिस्सलाम जनाबे अम्मार बिन यासिर, जनाबे हमज़ा, जनाबे अब्बास, हज़रत उमर और हज़रत अबूबकर के साथ बैठे हुए थे कि अचानक जिबरईले गेसूओं को खोले हुए नाज़िल हुए और नज़दीक आकर कहाः "ऐ मोहम्मद स० ! खुदा वन्दे आलम दुरूद व सलाम के बाद इरशाद फ़रमाता है कि आप स० चालीस शब व रोज़ जनाबे ख़दीजा के नज़दीक न जायें" रसूले अकरम सलल्लाहो अलैहे व आलेहि वसल्लम हुक्मे ख़ुदा पर अमल करते हुए जनाबे ख़दीजा स0 के नज़दीक नहीं गये इस दौरान आप दिन में रोज़ा रखते और शब के वक़्त इबादत में मशगूल रहते, आप ने जनाबे अम्मार रह० के ज़रिये हजरत ख़दीजा स० को पैगाम भेजा कि : "ऐ ख़दीजा! मैं हुक्मे इलाही के तहत कुछ मुद्दत तक तुम्हारे पास आने से माज़ूर हूँ, लेकिन तुम हरगिज़ यह न समझना कि मैं तुमसे नाराज़ हो गया हूँ, ऐसा नहीं है बल्कि मैं ख़ुदा की तरफ़ से मोअय्यन शुदा अय्याम की मुद्दत तमाम करने के बाद ज़रूर घर वापस आऊँगा मेरी अदम मौजूदगी में तुम हरगिज़ परेशान न होना इस लिये कि इस दुनिया में...