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इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद

🌐(इमाम हुसैन (अ.) की शहादत के बाद १. अहमद व बेहकी ने इब्ने अब्बास से रवायत की है किः- "उन्होंने कहा कि एक दिन ठीक निसफ़न्नहार (दोपहर) को हमने रसूल अल्लाह को परेशन हाल व गुबार आलूद देखा। आपके हाथ में एक शीशा था जिसमें ख़ूने ताज़ा था। मैंने अर्ज किया कि आपका यह क्या हाल है फरमाया रसूल अल्लाह (स.) ने कि हुसैन (अ.) और उनके असहाब कत्ल हो गये और यह मेरे हाथ में इनका खून है। बाद कत्ले हुसैन (अ.) मैंने शुमार किया तो दिन वही था जिसकी निशानदेही रसूल अल्लाह (स.) ने की थी "। २. हाकिम व बेहकी ने उम्मे सलमा से ब्यान किया :- उन्होंने फरमाया कि मैंने रसूल अल्लाह (स.) को ख़्वाब में यूँ देखा कि सरे मुबारक पर ख़ाक पड़ी हुई है। मैंने पूछा या रसूल अल्लाह (स.) यह मैं आपको किस हाल में पा रही हूँ तो हज़रत ने फरमाया कि मैं अभी अभी मकृतले हुसैन (जहां हुसैन कत्ल हुए, करबला) से वापस आ रहा हूँ"। ३. बेहकी व अबु नईम ने बुसरह अज़दीया से नक़्ल किया है कि वह कहती हैं:- " जब हुसैन कत्ल हुये तो आसमान से खून बरसा और जब हम लोगों ने सुबह की तो घड़े मटके और तमाम जुरूफ खून से भरे हुये थे "। ४. बेहकी औ...

इमाम हुसैन (अ.) की शहादत से पहले

🌐इमाम हुसैन (अ.) की शहादत से पहले १. तबरानी ने हज़रत आयशा से नक़्ल किया कि उन्होंने कहाः- “रसूल अल्लाह (स.) ने फ़रमाया कि जिबरईल ने मुझे यह ख़बर दी है कि मेरा फ़रज़न्द हुसैन मेरे बाद ज़मीने तफ (कर्बला) पर क़त्ल किया जायेगा और मेरे पास ख़ाके तुर्रबत लाये जहां हुसैन का मरक़द (क़ब्र) होगा"। २. अबु दाऊद व हाकिम ने अमुलफज़ल बिन्त हारिस से रवायत की है :- "रसूल अल्लाह (स.) ने फ़रमाया मेरे पास जिबरईल आए और यह ख़बर दी कि मेरी उम्मत मेरे बाद मेरे हुसैन को क़त्ल करेगी और उन्होंने कुछ खून आलूद सुर्ख मिट्टी मुझे दी" । ३. अहमद ने रेवायत की है कि :- "नबीए अकरम ने फरमाया कि मेरे घर पर एक ऐसा फर्शिता आया जो पहले कभी नहीं आया था, उसने मुझसे कहा कि, आपका नवासा हुसैन करबला में कत्ल किया जायेगा। अगर आप चाहें तो इस जगह की ख़ाक आपको दिखा दूँ जहाँ वह कत्ल होगा फिर उसने सुर्ख मिट्टी मुझे दी। ४. बग़वी ने अनस की हदीस से ऐखराज किया है : "फरिश्तए बारान ने परवर दिगारे आलम से इजाज़त ली कि वह नबीए अकरम (स.) की ज़्यारत करेगा उस वक़्त हुजूर उम्मे सलमा के घर में थे। फरमाया कि ऐ उम्मे सलमा दरवाज़...

कर्बला का जुगराफियाई (भोगौलिक) पस मंज़र

♦️कर्बला का जुगराफियाई (भोगौलिक) पस मंज़र जो सर ज़मीन कर्बला के नाम से मौसूम (नामित) है वह दरअसल इन कारीयों और ज़मीनी दुकड़ों का मजमुआ (समूह) है जो इस ज़माने में एक दूसरे से मुलहिक (जुड़े) थे। अरब में छोटे छोटे अरज़ी कत्आत मुख़्तलिफ नामों से मौसूम हुआ करते थे। चुंनाचे जब इन्हें इनकी खुसूसियत के एतबार से देखा जाता तो वह कई मुकाम मुतसव्वर (समझे) होते और जब इनकी बाहमी कुर्ब पर नज़र की जाती तो वह सब एक करार पाते और यही वजह है कि एक मुकाम का वाक़्या दूसरे मुकाम से मन्सूब किया जा सकता था। जैसा अल्लामा सैय्यद हेब्लुद्दीन शहर सतानी ने "नहज़तुल हुसैन” में तहरीर किया है। “कर्बला के महल वकू के तहत जो बहुत से नाम मशहूर हैं मसलन नैनवा, गाज़िरया और शते फरात इन्हीं एक ही जगह के मुतअदि नाम नहीं समझना चाहिये बल्कि वह मुतअद्दि जगहें थी जो बाहमी एत्तेसाल की वजह से एक ही समझी जा सकती थीं और इसलिये महल वकू वाक्या के एतबार से हर एक का नाम तआरूफ़ के मौके पर ज़िक्र किया जाना दुरूस्त है।" 🔹नैनवा यह एक गाँव था, इसके पहलू में गाज़िरयह था जो कर्बला बनी असद की एक शाख़ ग़ाज़रह से निसबत रखता था और इसमें यह...

ईदे ग़दीर 14 सितारे में

⭕असहाब का तारीख़ी इजमाअ और तबलीग़े रिसालत स० की आख़िरी मन्ज़िल हज़रत अली अ० की ख़िलाफत का ऐलान यह एक मुसल्लिमा हकीकत है कि खल्लाके आलम ने इन्तेख़ाबे खिलाफ़त को अपने लिये मख़सूस रखा है और इस में लोगों का दस्तरस नही होने दिया। फ़रमाया है। रब्बुका यख़लुको मा यशाओ व यख़तारो मा काना लहुमुल ख़ियरा सुब्हानल्लाहे तआला अम्मा युशरिकून "तुम्हारा रब ही पैंदा करता है और जिस को चाहता है। (नुबूव्वत व ख़िलाफत) के लिये मुनतख़ब करता है।" याद रहे कि इन्सान को न इन्तेख़ाब का कोई हक़ है और न वह इस में ख़ुदा के शरीक हो सकते हैं (प 20। रूकू 10)। यही वजह है कि उसने अपने तमाम खुलफ़ा आदम से खातम तक खुद मुकर्रर किये हैं और उनका ऐलान अपने नबियों के ज़रिये से कराया है। (📚रौज़तुस सफ़ा, तारीख़े कामिल, तारीख़ इब्ने अलवरदी, अराएस सालबी वगैरा और इस में तमाम अम्बिया के किरदार की मुवाफेक्त का इतना लेहाज़ रखा है। कि तारीख़े ऐलान तक में फ़क्र नही आने दिया। अल्लामा बहाई व अल्लामा मज्लिसी लिखते हैं कि तमाम अम्बिया ने खिलाफ़त का ऐलान 18 ज़िल-हिज्जा को किया है। (📚जामए अब्बासी व . एखतियाराते. मजलिसी) मोवरेखीन का इत्तेफ़...

ईदे अकबर ईदे ग़दीर

⭕ग़दीरे ख़ुम का वाक़िआ और जानशीन की तअ़यीन आमाले हज बजा लाने के बाद मुसलमान अपने अपने शहरों और देहात की तरफ़ रवाना हुए। आँ हज़रत स०अ० मदीने की तरफ़ चले। जब आँ हज़रत स०अ० का यह कारवाँ ग़दीरे ख़ुम की सरज़मीन (जहफा से पांच किलोमीटर के फास्ले) पर पहुंचा तो ख़ुदा की जानिब से हज़रते जिबरईल अ०स० सूरए माएदा की आयत नम्बर 67 लेकर आँ हज़रत पर नाज़िल हुए कि उसमें इरशाद हैः القرآن الكريم.. {۞ يَٰٓأَيُّهَا ٱلرَّسُولُ بَلِّغۡ مَآ أُنزِلَ إِلَيۡكَ مِن رَّبِّكَۖ وَإِن لَّمۡ تَفۡعَلۡ فَمَا بَلَّغۡتَ رِسَالَتَهُۥۚ وَٱللَّهُ يَعۡصِمُكَ مِنَ ٱلنَّاسِۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡكَٰفِرِينَ《٦٧ المائدة!》} {या अय्योहर्मूलो बल्लिग मा उन्ज़िला इलैका मिर्रब्बेका व इंल लम तअल फ्‌मा बल्लगता रिसालतहू वल्लाहो यअसेमोका मिनन्नासे......} "ऐ पैग़म्बर स०अ० ! आप इस हुक्म को पहुंचा दें जो आपके परवरदिग़ार की तरफ़ से नाज़िल किया गया है और अगर आप ने यह न किया तो गोया उसके पैग़ाम को नहीं पहुंचाया और ख़ुदा आपको लोगों के शर से महफूज़ रखेगा"। दर हक़ीक़त ग़दीर का बियाबान ऐसा चौराहा था जो हिजाज़ के लोगों के रा...

ज़ियारते इमामे अली रज़ा अलैहिस्सलाम की फ़ज़ीलतें

💠 ज़ियारते इमामे अली रज़ा अलैहिस्सलाम की फ़ज़ीलत 🔹इमाम तकी (अ.स.) जो शख़्स मेरे वालिद-ए-माजिद (इमाम रज़ा (अ.स.)) की ज़ियारत करेगा उसके लिए जन्नत है। वसाइल उश शिया, ज10, स304 इमाम सादिक़ (अ.स.) हमारी मौत के बाद हमारी ज़ियारत करने वाला, हमारी ज़िंदगी में हमारी ज़ियारत करने वाले इंसान के मानिंद है। आदाब ए इस्लामी, ज2, स277 इमाम काज़िम (अ.स.) ने इमाम अली रज़ा (अ.स.) की तरफ़ इशारा करके फ़रमाया, "जो शख़्स मेरे इस बेटे की ज़ियारत करेगा उसके लिए जन्नत है"। कामिल उज़ ज़ियारत, स410 इमाम रज़ा (अ.स.) जो हमारी ज़ियारत को नहीं आ सकते, वो हमारे नेक और सालेह शिया की मुलाक़ात करे। उन्हें हमारी ज़ियारत करने का सवाब मिलेगा… ग्रेटर सिंसI, 7 ग्रेटर सिंस इमाम सादिक़ (अ.स.) जो हमारी वफ़ात के बाद हमारी क़ब्रों की ज़ियारत करता है, वो हमारी ज़िंदगी में ही हमारी ज़ियारत कर रहा होता है। मीज़ान उल हिकमा (इंतेखाब ओ तख़लीस), ज3,स71 इमाम रज़ा (अ.स.) जो शख़्स भी मेरी ज़ियारत करेगा और उसे बारिश, सर्दी या गर्मी की कुछ तकलीफ़ पहुंचाएगी तो ख़ुदा उसके जिस्म को दोज़ख पर हराम क़रार दे देगा। वसाइल उश शिया, ज10,स30...

ख़ाके शिफ़ा की फ़ज़ीलत

🔰ख़ाके शिफ़ा की फ़ज़ीलत  "इमाम सादिक (अ.स.) अपने बच्चों को खाक-ए-शिफ़ा की घुट्टी दो के वो बलाओं से महफ़ूज़ रहेंगे। 📝तहजीब उल इस्लाम,स 263" "इमाम काज़िम (अ.स.) जब मय्यत को दफ़्न करें तो उसके मुंह के पास कर्बला की मिट्टी की एक सजदा-गाह रख दें। 📝तहज़ीब उल इस्लाम,स266" "रिवायत" अगर इस पाक मिट्टी (खाक ए शिफ़ा) को माल ए तिजारत में रख दिया जाए, तो वो माल तिजारत में बरकत का बाइस बनेगा। 📝इरफान ए मज़लूम, स22" "रिवायत" अपनी औलाद (नए जन्मे बच्चे) को आब-ए-फ़ुरात और खाक-ए-शिफ़ा की घुट्टी दो। और अगर यह न मिल सके तो बारिश के पानी की दो। 📝वसाइल उश शिया,ज15,स130" "इमाम काज़िम (अ.स.) मोमिन के पास 5 चीज़ें रहनी चाहिए: मिस्वाक (टूथब्रश), कंघी (कंघी), जा-नमाज़, खाक ए शिफ़ा की 34 दाने की तस्बीह और अक़ीक़ की अंगूठी। 📝तहज़ीब उल इस्लाम, स266" "इमाम सादिक़ (अ.स.) बच्चे (नवजात शिशु) को खाक ए क़ब्र ए इमाम हुसैन (अ.स.) (खाक ए शिफ़ा) की घुट्टी दो के उसको बहुत से दर्दों से, बलाओं से, बीमारियों से महफ़ूज़ रखेगी। 📝तहज़ीब उल इस्लाम,स124" "...