ख़ुत्बा ए अयादत
ख़ुत्बा ए अयादत शुएैब बिन गफ़ला कहते हैं कि जिस वक़्त हज़रते फ़ातिमा ज़हरा सअ के दुनिया से रुख़सती का वक़्त क़रीब आया तो मुहाजरीन व अंसार की ख़्वातीन आप की अयादत के लिए हाज़िर हुईं और आपसे पूछा के एै बिन्ते पैग़म्बर अब आप की तबीयत कैसी है तो आप ने ख़ुदा की हम्दो सना और अपने बाबा पर दुरूद और सलाम के बाद फ़रमाया :- बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर रहीम बा ख़ुदा मेरी कैफ़ियत ये है के अब मैं तुम्हारी दुनिया से बेज़ार और तुम्हारे मर्दों से मुत्नफ़्फ़िर हो चुकी हूं, मैंने उन्हें आज़माने के बाद उन से दूरी अख़्तियार कर ली है उनका इम्तेहान लेने के बाद मुझे उनसे नफ़रत हो गई ग़ासिबो के मुक़ाबले में सुकूत, इस्लामो मुस्लेमीन से ख़ेड़वाड़, फ़ुज़ूल काम और दुश्मनों के सामने झुक जाना, आक़ायद की ख़राबी और अफ़कार की गुमराही ये सब किस क़द्र बुरा है। यकीनन उनके नुफ़ूस ने अपने मुस्तक़बिल के लिए बहुत बुरा इंतेज़ाम किया है जिस के सबब अल्लाह उन पर ग़ज़बनाक हो गया और वो हमेशा के लिए अज़ाब में गिरफ़्तार हो गए। तो फिर हमने भी उन की लगाम ख़ुद उनकी गर्दन पर डालदी और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया ज़िल्लत का सेहरा उन्ही...