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बेसअते रसूले ख़ुदा व मेराज हज़रते रसूले ख़ुदा सअवव

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बेअसते रसूले इस्लाम Share 0 सारे वोट0.0 / 5लेख ›रसुले अकरम व अहले बैत ›रसूले अकरम(स) में प्रकाशित 2022-02-28 00:00:00 लेखक: मौलाना नजमुल हसन कर्रारवी स्रोत: चौदह सितारे मुवर्रेख़ीन का बयान है कि आं हज़रत (स अ व व ) इसी आलमे तनहाई में मशग़ूले इबादत थे कि आपके कानों में आवाज़ आई या मोहम्मद (स अ व व ) आपने इधर उधर देखा कोई दिखाई न दिया , फिर आवाज़ आई फिर आपने इधर उधर देखा , नागाह आपकी नज़र एक नूरानी मख़लूक़ पर पड़ी वह जनाबे जिब्राईल थे उन्होंने कहा इक़रा पढ़ो , हुज़ूर ने इरशाद फ़रमाया माइक़रा क्या पढ़ूं ? उन्होनें अर्ज़ की इक़रा बइस्मे रब्बेकल लज़ी ख़लक़ फिर आपने सब कुछ पढ़ दिया क्यो कि आपको इल्में क़ुरआन पहले से हासिल था। जिब्राईल (अ.स.) के इस तहरीक़े इक़रा का मक़सद यह था कि नुज़ूले क़ुरआन की इब्तेदा हो जाए। उस वक़्त आपकी उम्र 40 साल 1 दिन की थी। उसके बाद जिब्राईल ने वज़ू और नमाज़ की तरफ़ इशारा किया व अरकात की तादाद की तरफ़ भी हुज़ूर को मुतवज्जे किया चुनान्चे हुज़ूरे आला ने वज़ू किया और नमाज़ पढ़ी आपने सब से पहले जो नमाज़ पढ़ी वह ज़ोहर की थी। फिर हज़रत वहां से अपने घर तशरीफ़ लाये और ख़दीजातुल कुबरा और अली बिन अबी...

जंगे ख़ैबर

जंगे ख़ैबर : ख़ैबर मदीनाए मुनव्वरा से तकरीबन पच्चासी मील के फासले पर यहूदियों की बस्ती थी इस के बाशिन्दे यूंही इस्लाम के उरूज से जल भुन रहे थे कि मदीने में जिला वतन यहूदियों ने उनसे मिल कर उनके हौसले बलन्द कर दिये। उन्हों ने बनी असद और बनी गतफ़ान के भरोसे पर मदीने को तबाह व बरबाद कर डालने का मन्सूबा बांधा और उसके लिये मुकम्मल फौजी तय्यारियां करली। जब आंहज़रत को उनके अज़्म व इरादे की ख़बर हुई तो आप 14 सफ़र सन 7- हिजरी को 1400 पैदल और 200 सवार लेकर फितने को फ़रो करने के लिये मदीने से बरामद हुए और ख़ैबर में पहुंच कर किला बन्दी करली और मुसलमान उन्हें मोहासरे में लेकर उनसे मुसलसल लड़ते रहे। लेकिन किलाए कमूस फतह न हो सका। 📚तारीख़े तबरी, व ख़मीस और शवाहेदुन नबूवा सफ़ा 85 में है कि आंहज़रत ने फ़तेह किला के लिये उमर को भेजा। फिर है अबू बक्र को रवाना किया। इसकी बाद फिर उमर को हुक्मे जिहाद दिया। लेकिन यह हज़रात नाकाम वापस आये 📚तारीख़े तबरी जिल्द 3 सफ़ा 93 में है कि तीसरी मरतबा जब अलमे इसलाम पूरी हिफाज़त के साथ हज़रत स० की ख़िदमत में पहुँच रहा था। रास्ते में लश्कर वालों ने सिपाह सालार की बुज़दिल...

सवाना ए हयात इमाम मोहम्मद बाक़िर अस

🗒️ इमाम मोहम्मद बाक़िर अ.स. की ज़िंदगी पर एक निगाह आपका नाम मोहम्मद और लक़ब बाक़िर था और रिवायत को देखते हुए कहा जा सकता है कि आपको नाम और लक़ब दोनों पैग़म्बर स.अ. ने दिए थेl आपकी विलादत पहली रजब सन् 57 हिजरी को हुई और आपने लगभग साढ़े तीन साल अपने जद इमाम हुसैन अ.स. के साए में ज़िंदगी गुज़ारी और कर्बला के अज़ीम हादसे को आंखों से देखा और सारे मसाएब में अहले हरम के साथ रहे और अपने वालिद के साथ इस्लाम को बचाने की राह में क़ुर्बानी देते रहेl 📝आपकी अज़मत आपकी अज़मत और हैबत का आलम यह था कि अब्दुल्लाह इब्ने अता मक्की कहा करते थे कि मैंने किसी के सामने उलमा का क़द इतना छोटा नहीं देखा जितना इमाम बाक़िर अ.स. के सामने देखाl 📚(अल इरशाद, पेज 263) इब्नुल एमाद हमबली का कहना था कि अबू जाफ़र मोहम्मद बाक़िर अ.स. मदीने के फ़ोक़हा में से थे और उन्हें उनकी इल्म की गहराइयों और बारीकियों की वजह से बाक़िर के लक़ब से याद किया जाता हैl 📚(अल इमामुस सादिक़ वल मज़ाहिबुल अरबआ, जिल्द 2, पेज 436) 📝अल्लाह से आपका रिश्ता इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स. का बयान है कि मेरे वालिद बेहद अल्लाह का ज़िक्र करते थे, रास्ता चलते थे ...

मुख़्तसर तअर्रुफ़ इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम

रसूले इस्लाम हज़रते मोहम्मद मुस्तफ़ा सअवव ने आप अलैहिस्सलाम की विलादत से क़ब्ल ही अपने ख़ास सहाबी जनाबे जाबिर बिन अब्दुल्लाहे अंसारी को आप की विलादते बासअदत की ख़बर देते हुए आप को बाक़िर का लक़ब दिया था। आप का नाम मोहम्मद बिन अली बिन हुसैन बिन अली इब्ने अबितालिब अलैहिस्सलाम है (54-114 हिजरी) आप 54 हिजरी मदीना ए मुनव्वरा में पैदा हुए। इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम के नाम से मशहूर शियों के पांचवें इमाम हैं। आप का मशहूर लक़ब बाक़िर है जिसे हदीसे लौह के मुताबिक रसूले ख़ुदा सअवव ने आप की विलादत से पहले आप को दिया है। फ़रज़न्दे रसूले ख़ुदा इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम मुसलमानों के वो अज़ीम पेशवा व रहनुमा हैं जिन्होंने तशनागाने हक़ व मारफ़त को हमेशा तौहीद व इंसानियत का दर्स दिया और इल्मो दानिश के वो सरचश्मे जारी किये के आप का लक़ब ही बाक़िरुल उलूम यानि इल्म का सीना शिग़ाफ़ करने वाला पड़ गया। आप की मुद्दते इमामत 19 बरस थी (95-114 हिजरी)। आप की इमामत बनी उमय्या के पांच ख़लीफ़ाओं (वलीद बिन अब्दुल मलिक,सुलेमान बिन अब्दुल मलिक,उमर बिन अब्दुल अज़ीज़,यज़ीद बिन अब्दुल मलिक व हेशाम बिन अब्दुल मल...

ज़ियारते इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम

ज़ियारते इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम अस्सलामो अलैका या इमामल होदा अस्सलामो अलैका या बदरद्दोजा अस्सलामो अलैका या कहफ़त्तोका अस्सलामो अलैका या काएदा अहलित्तकवा अस्सलामो अलैका या बाक़ेरा इल्मिन नबीयीना अस्सलामो अलैका या ज़ैनस्समावाते वल अरज़ीना अल्लाहुम्मा कमा जअलतहू अलामल लेएबादेका वमुस्तौ दअल लेहिलमेका वमोतरजेमल लेवहीका फसल्ले अलैहे अफज़ला मा सल्लैता अला अहादिम्मिन जुर्रीयते अम्बेयाएका व असफेयाएका व रोसोलेका ओमनाएका या रब्बल आलमीन