मुख़्तसर तअर्रुफ़ इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम
रसूले इस्लाम हज़रते मोहम्मद मुस्तफ़ा सअवव ने आप अलैहिस्सलाम की विलादत से क़ब्ल ही अपने ख़ास सहाबी जनाबे जाबिर बिन अब्दुल्लाहे अंसारी को आप की विलादते बासअदत की ख़बर देते हुए आप को बाक़िर का लक़ब दिया था। आप का नाम मोहम्मद बिन अली बिन हुसैन बिन अली इब्ने अबितालिब अलैहिस्सलाम है (54-114 हिजरी) आप 54 हिजरी मदीना ए मुनव्वरा में पैदा हुए। इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम के नाम से मशहूर शियों के पांचवें इमाम हैं। आप का मशहूर लक़ब बाक़िर है जिसे हदीसे लौह के मुताबिक रसूले ख़ुदा सअवव ने आप की विलादत से पहले आप को दिया है। फ़रज़न्दे रसूले ख़ुदा इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम मुसलमानों के वो अज़ीम पेशवा व रहनुमा हैं जिन्होंने तशनागाने हक़ व मारफ़त को हमेशा तौहीद व इंसानियत का दर्स दिया और इल्मो दानिश के वो सरचश्मे जारी किये के आप का लक़ब ही बाक़िरुल उलूम यानि इल्म का सीना शिग़ाफ़ करने वाला पड़ गया। आप की मुद्दते इमामत 19 बरस थी (95-114 हिजरी)। आप की इमामत बनी उमय्या के पांच ख़लीफ़ाओं (वलीद बिन अब्दुल मलिक,सुलेमान बिन अब्दुल मलिक,उमर बिन अब्दुल अज़ीज़,यज़ीद बिन अब्दुल मलिक व हेशाम बिन अब्दुल मलिक) के दौर में रही। 57 साल की उम्र में 7 ज़िल्हिज 114 हिजरी को शहादत पा गए। बाज़ का कहना है के हेशाम बिन अब्दुल मलिक और बाज़ के मुताबिक़ इब्राहीम बिन वलीद आप की शहादत का सबब बने। आप वाक़या ए कर्बला के दौरान कम सिन थे और चश्मदीद गवाह भी हैं।
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