ज़ियारते अरबाईन का तर्जुमा
⚫ज़ियारते अरबाईन का तर्जुमा........ सलाम खुदा के दोस्त और उसके महबूब पर सलाम खुदा के खलील और उसके चुने हुवे पर सलाम खुदा के चुने हुवे के बेटे पर सलाम मज़लूम और शहीद हुसैन (अ०) पर सलाम मुसीबत में गिरफ्तार और कत्ल किये हुवे (हुसैन अ०) पर खुदा वन्दा मैं गवाही देता हूँ, इस बात की कि वह तेरे दोस्त हैं और तेरे दोस्ते के बेटे और तेरे चुने हुवे हैं और तेरे चुने हुवे के बेटे वह कामियाब हुवे हैं तेरी तरफ से इज़्ज़त के साथ और तूने उनको बुजुर्ग (बड़ा) करार दिया है, शहादत के साथ और अता की है उनको सआदत और सरबुलन्दी और मखसूस किया है उन को पाकीजः पैदाइश के साथ और करार दिया है उनको एक सरदारों में से और एक रहनुमा रहनुमाओं में से और एक मुजाहिद मुजाहिदीन में से और अता की है उन को मीरासें नबीयों (अ०) की और करार दिया है उनको हुज्जत अपने मखलूकात पर औसिया (वसीयों) में से अतः उन्हें हक की दावत दी और नसीहत पेश की और खैर ख़्वाही सर्फ की आज़माइश के मौके पर और दे दी अपनी जान तेरे रास्ते में ताकि निकालें तेरे बन्दों को जिहालत और मुमराही की हैरत से और उनके खिलाफ ऐका किया उन लोगों ने जो दुनिया के फरेब (धोके) में मुबत...