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ज़ियारते अरबाईन का तर्जुमा

⚫ज़ियारते अरबाईन का तर्जुमा........ सलाम खुदा के दोस्त और उसके महबूब पर सलाम खुदा के खलील और उसके चुने हुवे पर सलाम खुदा के चुने हुवे के बेटे पर सलाम मज़लूम और शहीद हुसैन (अ०) पर सलाम मुसीबत में गिरफ्तार और कत्ल किये हुवे (हुसैन अ०) पर खुदा वन्दा मैं गवाही देता हूँ, इस बात की कि वह तेरे दोस्त हैं और तेरे दोस्ते के बेटे और तेरे चुने हुवे हैं और तेरे चुने हुवे के बेटे वह कामियाब हुवे हैं तेरी तरफ से इज़्ज़त के साथ और तूने उनको बुजुर्ग (बड़ा) करार दिया है, शहादत के साथ और अता की है उनको सआदत और सरबुलन्दी और मखसूस किया है उन को पाकीजः पैदाइश के साथ और करार दिया है उनको एक सरदारों में से और एक रहनुमा रहनुमाओं में से और एक मुजाहिद मुजाहिदीन में से और अता की है उन को मीरासें नबीयों (अ०) की और करार दिया है उनको हुज्जत अपने मखलूकात पर औसिया (वसीयों) में से अतः उन्हें हक की दावत दी और नसीहत पेश की और खैर ख़्वाही सर्फ की आज़माइश के मौके पर और दे दी अपनी जान तेरे रास्ते में ताकि निकालें तेरे बन्दों को जिहालत और मुमराही की हैरत से और उनके खिलाफ ऐका किया उन लोगों ने जो दुनिया के फरेब (धोके) में मुबत...

ज़ियारते अरबाईन

⚫ज़ियारते अरबाईन  इस महीने की बीस तारीख़ को हज़रत सय्येदुश शोहदा का चेहल्लुम है। इस दिन हज़रत इमाम हुसैन (अ०) की ज़ियारत पढ़ने में बहुत सवाब है। हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ०) से रिवायत है कि मोमिन की पाचँ निशानीयाँ हैं। दिन और रात में वाजिब और नवाफिल की (51) इक्कयावन रकअत नमाज़ पढ़ना, ज़ियारत-ए-अरबीन पढ़ना, दाहिने हाथ में अगूंठी पहनना, खाक पर सिज्दः करना और बिस्मिल्लाहिर्रहमा निररहीम तेज़ आवाज़ से कहना। 🔸इमाम जाफ़र सादिक (अ०) से फरमाया कि सफ़र की बीसवीं तारीख़ को उस वक्त जब कि सूरज ऊँचा हो रहा हो, इमाम हुसैन (अ०) की ज़ियारत पढ़ो और कहो : "अस्सलामो अला वलीयिल्लाह व हबीबेः अस्स्लामो अला खलीलिल्लाह व नजीबेः अस्सलामो अला सफीयिल्लाहे वब्ने सफीयेः अस्सलामो अलल हुसैनिल मज़लूमिश शहीद अस्सलामो अला असीरिल करोबाते व कृतीलिल अबारात अल्लाहुम्मा इन्नी अश्हदो अन्नाहू वलीयोका वब्नो वलीयेका व सफीयोका वब्नो सफीयेकल फाऐज़ो बे करामतेका अक्रम्ताहू बिश शहादते व हबौताहू बिस्सआदाते वज्ताबैताहू बेतीबिल विलादाते व जाअल्ताहू सय्येदम मेनस सादाते काऐदम मेनल कादाते व ज़ाऐदम मेनज़ ज़ादाते व अअतैताहू मवारीसल अनाबि...