ज़ियारते आशूरा का तर्जुमा
📖ज़ियारते आशूरा का तर्जुमा📖
ख़ुदाए रहमान व रहीम के नाम से शुरू करता हूँ।
सलाम हो आप पर ऐ अबू अब्दिल्लाह , सलाम हो आप पर ऐ रसूलुल्लाह के बेटे, सलाम हो आप पर ऐ अमीरुल मोमिनीन और सय्यदिल मोमिनीन के बेटे, सलाम हो आप पर ऐ आलमीन की औरतों की सरदार ज़हरा के बेटे, सलाम हो आप पर ऐ वह शहीदे राहे खुदा, जिसके खून का बदला परवरदिग़ार के ज़िम्मे है और जो अकेला रह गया था, सलाम हो आप पर और उन रूहों पर जिन्होंने आपके जवार में क़याम किया है, आप सब पर हमेशा परवरदिग़ार का सलाम जब तक मै बाकी रहूँ और रात व दिन बाकी रहें, या अबा अब्दिल्लाह ! यह हादिसा बड़ा अज़ीम है, और यह मुसीबत बड़ी जलील व अज़ीम है, हमारे लिये और तमाम अहले इस्लाम के लिये, आपकी यह मुसीबत जलील व अज़ीम है आसमानों में, तमाम आसमान वालों के लिये, तो अल्लाह लअनत करें उस कौम पर जिसने आप अहलेबैत पर जु़ल्म व जौर की बुनियाद डाली है, और अल्लाह लअनत करे उस क़ौम पर जिसने आपको आपके मकाम से हटा दिया है, और उस मरतबे से गिरा दिया है जिस पर खुदा ने आपको रखा था और अल्लाह लअनत करे उस उम्मत पर जिसने आपको क़त्ल किया है और लअनत करे उस क़ौम पर जिसने उन ज़ालिमों के लिए आपसे जंग करने की ज़मीन हमवार की है मैं खुदा और आपकी बारगाह में उन सबसे बराअत करता हूँ और उनके पैरोकारों, चाहने वालों और इत्तेबा करने वालों से,या अबा अब्दिल्लाह । मैं आपसे सुल्ह करने वालों के लिये सरापा सुल्ह, और आपसे जंग करने वालों के लिये कयामत तक सरापा जंग हूँ और अल्लाह लअनत करे आले ज़ियाद और आले मरवान पर और लअनत करे तमाम बनी उमय्यः पर और लअनत करे इब्ने मरजानः (इब्ने ज़ियाद) पर और लअनत करे उमर बिन सअद और लअनत करे शिम्र पर और लअनत करे उस क़ौम पर जिसने जीन कसा और लगाम लगाई और नकाब पहनी आपसे जंग करने के लिये आप पर मेरे माँ-बाप कुर्बान, आपकी मुसीबत मेरे लिये बहुत अज़ीम है मैं उस ख़ुदा से सवाल करता हूँ जिसने आपके मकाम को मोहतरम बनाया है और आपकी वजह से मुझे भी इज़्ज़त दी है कि मुझे नसीब करे आपके दुश्मनों से इन्तेक़ाम उस इमाम के साथ जिसकी नुसरत का वादा किया गया है पैग़म्बरे इस्लाम के अहलेबैत में से ख़ुदाया मुझे अपनी बारगाह में आबरूमन्द करार दे दे हुसैन अलैहिस्सलाम के सदक़े में दुनिया और आख़िरत में या अबा अब्दिल्लाह मैं अल्लाह की तरफ़, रसूले अकरम और अमीरुल मोमिनीन, हज़रत फ़ातिमा, इमाम हसन और आपकी तरफ़ तक़र्रुब चाहता हूँ आपकी मुहब्बत और आपके क़ातिलों और दुश्मनों से बराअत के ज़रिए और उनसे बेज़ारी के ज़रीये जिन्होंने आप पर ज़ुल्म व जौर की बुनियाद रखी है मैं ख़ुदा व रसूल की बारगाह में बेज़ार हूँ उन तमाम लोगों से जिन्होंने जु़ल्म की बुनियाद रखी या उसकी इमारत तैयार की,और आप पर और आपके चाहने वालों पर जु़ल्म व जौर का सिलसिला जारी रखा मैं ख़ुदा और आपकी बारगाह में इज़हारे बराअत करता हूँ उन सबसे और ख़ुदा की बारग़ाह में और फिर आपकी जनाब में तक़र्रुब चाहता हूँ आप और आपके दोस्तों की मुहब्बत के ज़रीये और आपके दुश्मनों और आपसे जंग करने वालों से बेज़ारी के ज़रीये और फिर उन सबके इत्तेबाअ और पैरोकारों से बेज़ारी के ज़रीये मैं सरापा सुल्ह हूँ उसके लिए जो आपसे सुल्ह रखे और सरापा जंग हूँ उसके लिये जो आपसे जंग करे मैं आपके दोस्तों का दोस्त और आपके दुश्मनों का दुश्मन हूँ मेरी गुज़ारिश उस मअबूद से है जिसने आपकी मारेफ़्त और आपके दोस्तों की मारेफ़त से नवाज़ा है और आपके दुश्मनों से बराअत की तौफ़ीक दी है कि मुझे दुनिया व आखे़रत में आपके साथ क़रार दे दुनिया व आख़ेरत में आपकी बारग़ाह में साबित क़दम रखे और मेरी दुआ है कि मुझे आप हज़रात के मकामे महमूद तक पहुँचा दे और मुझे नसीब करे आपके खू़्न का इन्तेक़ाम उस इमामे हादी के साथ जो आप हज़रात के हक़ का एलान करने वाला है और मैं परवरदिग़ार से सवाल करता हूँ आपके हक़ और उसकी बारग़ाह में आपकी शान का वास्ता देकर कि मुझे इस मुसीबत में इससे बेहतर अज्र अता करे जो किसी भी मुसीबत वाले को किसी मुसीबत में अता किया है ये मुसीबत कितनी अज़ीम है और इसका हादिसा कितना जलील है इस्लाम में और तमाम आसमानों और ज़मीन में ख़ुदाया मुझे उस मंज़िल पर उन लोगों में क़रार दे दे जिन तक तेरी सलवात और रहमत और मग़फ़ेरत पहुँचने वाली है ख़ुदाया, मेरी ज़िन्दगी को मोहम्मद व आले मोहम्मद की ज़िन्दगी, और मेरी मौत को मोहम्मद व आले मोहम्मद जैसी मौत क़रार दे दे ख़ुदाया यह वह दिन है जिसे बनी उमय्यः और जिगरख़ारा की औलाद ने बरकत का दिन करार दिया था जिन पर तूने और तेरे पैग़म्बर ने लअनत की है हर मक़ाम, हर मंज़िल और हर जगह में जहाँ तेरे पैगम्बर ने क़याम किया है ख़ुदाया अबू सुफ़ियान, मुआविया, यज़ीद बिन मुआविया पर लकनत कर और उन सब पर तेरी लअनत हो हमेशा-हमेशा यह वह दिन है जिसमें आले ज़ियाद और आले मरवान ने खुशी मनायी, कि हुसैन अलैहिस्सलाम को क़त्ल कर दिया है ख़ुदाया उन पर अपनी तरफ़ से लअनत और दर्दनाक अज़ाब को दुगना चौगुना कर दे खु़दाया मैं तुझ से आज के दिन, इस मकाम पर और तमाम ज़िन्दगी तक़र्रुब चाहता हूँ उन सबसे बेज़ारी, लअनत और रसूल व आले रसूल की मुहब्बत के ज़रिए (उन तमाम हज़रात पर तेरा सलाम)
🔸अहलेबैत के दुश्मनों पर लअनत (जिसको सौ बार दोहराना है)
ख़ुदाया लअनत कर पहले ज़ालिम पर जिसने मोहम्मद व आले मोहम्मद पर ज़ुल्म किया है और आखिरी फ़र्द पर जो उनकी इस राह में पैरवी करे ख़ुदाया लअनत कर उस गरोह पर जिसने हुसैन से जंग की और उनके क़त्ल के लिये ज़ालिमों की पैरवी की और उनकी बैअत की। खुदाया उन सब पर लअनत नाज़िल फरमा।
🔸शोहदाए कर्बला पर सलाम (सौ बार)
सलाम हो आप पर या अबा अब्दिल्लाह और उन पाकीज़ा रूहों पर जो आपके साथ मुकीम है मेरी तरफ़ से आप पर अल्लाह का सलाम जब तक मैं ज़िन्दा रहूँ और जब तक दिन-रात बाकी रहें अल्लाह इस ज़ियारत को आपकी बारग़ाह में आख़िरी हाज़िरी न करार दे सलाम हो हुसैन पर और अली इब्ने हुसैन पर और हुसैन की औलाद और हुसैन के असहाब पर।
🔸तमाम क़ातिलानै इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम पर लअनत (एक बार पढ़े)
ख़ुदाया मेरी लअनत को मख़सूस कर दे उस पहले शख़्स से जिसने ज़ुल्म किया है उससे शुरूआत कर फिर दूसरे, तीसरे, चौथे पर लअनत ख़ुदाया पाँचवें मरहले पर यज़ीद पर लअनत कर और फिर उबैदुल्लाह बिन ज़ियाद पर लअनत कर और उमर बिन सअद और शिम्र पर लअनत कर और अबू सुफ़ियान, ज़ियाद, मरवान की औलाद पर लअनत कर कयामत तक।
🔸दुआए सजदा
ख़ुदाया तेरे लिये तारीफ़ है वो तारीफ़ जो शुक्र गुज़ार बन्दे मुसीबतों में किया करते हैं शुक्र है परवरदिग़ार का इस मुसीबत पर भी ख़ुदाया मुझे हुसैन की शफ़ाअत नसीब कर जब तेरी बारगाह में हाज़िर हूँ और मुझे अपनी बारग़ाह में साबित कदमी इनायत फ़रमा इमाम हुसैन और उनके उन असहाब के साथ जिन्होंने अपनी जानें कुर्बान कर दीं हुसैन अलैहिस्सलाम के हुजूर में।
🔸यह फ़िक्रे दोहराते हुए सात बार आगे बढ़े और फिर पीछे आये :-
हम अल्लाह के लिये हैं और उसकी बारगाह में पलट कर जाने वाले हैं उसके फ़ैसले पर राज़ी हैं और उसके हुक्म के सामने सर झुकाए हुए हैं।
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