जनाबे हानी बिन उरवाह

 जनाबे हानी कौन थे ❓

हानी इब्ने उरवाह क़बीला मुराद के सरदार थे, और जब ये चलते थे तो 12 हज़ार आहन पोश सवार इनके हमरेकाब होते थे। इस तरह जनाबे मुस्लिम अस ने हानी के घर में पनाह ले कर अपने को ज़ाहेरी तौर पर 12000 शमशीर ज़न बहादुरों के हल्क़े में पहुंचा दिया था। (📚तफ़सीरे कर्बला), इमाम अली अ.स. के ख़ास सहाबी और कूफ़े के बुज़ुर्ग लोगों में से थे, आप जमल और सिफ़्फ़ीन की जंग में भी मौजूद थे, जब हुज्र इब्ने अदी ने ज़ेयाद इब्ने अबीह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई तो हानी इब्ने उरवह उनके मिशन का अहम हिस्सा थे, और यज़ीद की बैअत के हमेशा विरोधी रहे, और उबैदुल्लाह इब्ने ज़ियाद के कूफ़ा पहुंचने के वक़ हानी का घर शियों के राजनीतिक और फ़ौजी लोगों का सेंटर था, मुस्लिन इब्ने अक़ील के क़ेयाम में आपका अहम किरदार था, मुस्लिम इब्ने अक़ील की शहादत के बाद आपका सर भी इब्ने ज़ेयाद के हुक्म से आपके बदन से अलग कर दिया गया, आपकी शहादत की ख़बर इमाम हुसैन अ.स. को कूफ़े के रास्ते में मिली, इमाम अ.स. आपकी शहादत की ख़बर सुन कर बहुत रोए और आप पर रहमत नाज़िल करने की अल्लाह से दुआ की, आपको कूफ़े के दारुल एमारह में ही दफ़्न किया गया और आज शिया इनकी क़ब्र पर ज़ियारत के लिए जाते हैं।

अमहट अज़ादारी पोर्टल :- जनाबे हानी ने हज़रते मुस्लिम अस को मुख़फ़ी तौर पर अपने यहां रखा और बजुज़ उन मख़्सूस अफ़राद के कि जो क़ाबिले ऐतेमाद थे इस राज़ को किसी पर भी आशकार नहीं किया क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि अनकरीब हुकूमत की तरफ़ से जनाबे मुस्लिम अस के ख़िलाफ़ ज़ाहिराना अक़दाम होगा।

जनाबे मुस्लिम अस के मुख़लेसीन भी इसी नतीजे पर पहुंच गए थे कि हुकूमत की तरफ़ से जो भी कारवाई हो रही है वो जनाबे मुस्लिम अस की तलाश व जुस्तजू में हो रही है इस लिये वो भी परेशान व फ़िकरमंद थे और बहम इन मश्विरों में मसरूफ़ थे कि इब्ने ज़ियाद से टकराव की सूरत पैदा हुई तो क्या होगा ? मुख़्तसर ये है कि इब्ने ज़ियाद ने अपने शामी ग़ुलाम मुअक्किल को 3000 दिरहम देकर मुक़र्रर किया कि मुस्लिम अस का पता लगाओ, एक दिन मुअक्किल ख़ुफ़िया तौर पर पता लगाता हुआ मस्जिद में दाख़िल हुआ जहां जनाबे मुस्लिम इब्ने औसजा नमाज़ पढ़ा करते थे वो देर तक मुस्लिम इब्ने औसजा के इन्तज़ार में बैठा रहा (📚अख़बारूल तवाल,स236) और जब मुस्लिम नमाज़ से फ़ारिग़ हुए तो उनके पास आकर बैठ गया और कहने लगा कि मैं शाम का रहने वाला ज़ुलकला का ग़ुलाम हुं और मोहिब्बे अहलेबैत अस हुं सुना है कि आले रसूल में से कोई कुफ़े में आया है क्या आप उनसे मेरी मुलाकात करवा सकते हैं इब्ने औसजा ने टाला फिर अहदो पैमान लिया की किसी से कुछ ना बताओ गे मगर उसके इसरार पर जनाबे मुस्लिम अस से उसकी मुलाकात करवा दी अब वो मुस्लिम अस के पास रुक गया और पल पल कि जानकारी इब्ने ज़ियाद को देता रहा (📚अख़बारूल तवाल,स237) एक दिन इब्ने ज़ियाद तमाम तफ़सीलात जानने के बाद जनाबे हानी को दारुल आमारा में बुलवा कर कहने लगा कि मुस्लिम को तुम क्यों अपने घर में रखे हो जनाबे हानी इनकार करते रहे जब इब्ने ज़ियाद ने मुअक्किल को बुलाया तो जनाबे हानी सब समझ गए और फिर कहा कि मैंने नहीं रखा वो ख़ुद ही चले आए मै अभी उन्हें जाकर अपने घर से निकाल दूंगा इसी में बात बढ़ती गई फिर जनाबे हानी को इब्ने ज़ियाद ने शमशीर ने ज़ख़्म पहुचा कर क़ैदख़ाने में डाल दिया जब ये ख़बर हानी के क़बीले वालो को मालूम हुई तो वो सब दारूल आमारा को चारों तरफ़ से घेर लिया जब इब्ने ज़ियाद ने ये मंज़र देखा तो घबरा कर क़ाज़ी शुरै को बुलाया और कहा जाओ क़ैदख़ाने में जा कर देखो हानी ज़िन्दा हैं क़ाज़ी क़ैदख़ाना गया जब उसने हानी को देखा तो हानी सांसे चल रही थी क़ाज़ी पलट कर आया और उसने यक़ीन दिलाया कि हानी सही सलामत हैं हुकूमत को उनसे कुछ अहम काम है इस लिये उन्हें दरबार में रखा है ये सुनकर सारे क़बीले वाले चले गए। उसके बाद हज़रते मुस्लिम अस शहीद हो गए बाद में इब्ने ज़ियाद ने जनाबे हानी को भी क़त्ल करवा दिया। (📚 तफ़सीरे कर्बला)

नोट:- ये जनाबे हानी बिन उरवाह कि मुख़्तसर तारीख़ है।

✍️ वफ़ा अब्बास ख़ान, अमहट सुल्तानपुर 

📱7860049747




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