अज़ादारी अहलेबैत अस की नज़र में

अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में

1
इमाम काज़िम (अस)
 ने मुख़्तलिफ़ मौक़े पर मजलिस ए अज़ा का एहतमाम किया। 📚हमारी अज़ादारी, स 33

2
इमाम सादिक (अ.स.)
 ने अबू बसीर से फ़रमाया, "बुलंद आवाज़ में रोया करो"। 
📚हमारी अज़ादारी, स 33

3
रसूल ख़ुदा (स.अ.व.) 
बेशक, हुसैन (अ.स.) हिदायत का चिराग़ और नजात की कश्ती है। 
📚इरफ़ाने मज़्लूम है, स 8

4
रसूल ख़ुदा (स.अ.व.) 
बेशक, हुसैन (अ.स.) की मोहब्बत मोमेनीन के दिलों में पोशिदा है। 
इरफ़ान ए मजलूम, स 11

5
इमाम सादिक (अ.स.) 
जो हम पर हुए ज़ुल्म पे ग़मज़दा है, उसकी हर सांस तस्बीह है और उसका मातम इबादत है। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

6
इमाम रज़ा (अस) 
ऐ इब्ने शबीब! अगर तू रोना चाहता है तो फिर हुसैन बिन अली (अ.स.) पर रोया कर।
📚 क़ुर्बान उश शहादा, स 81

7
इमाम सादिक (अ.स.)
 ऐ ज़ुरारह! आसमान 40 दिन तक शहादते इमाम हुसैन (अ.स.) पे रोया था। 
📚मुस्तदराकल वसाएल, ज1, स391, अज़ादारी-40 हदीस

8
इमाम हुसैन (अस)
 जिस शख़्स की आंख से हमारे ग़म में एक आंसू निकल आए तो अल्लाह तआला उसे जन्नत के एक महल अता फ़रमाएगा। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स180

9
रिवायत
इमाम तकी (अ.स.), इमाम नक़ी (अ.स.) और इमाम असकरी (अ.स.) ने भी मुख़्तलिफ़ अव्क़ात में गिरया ओ ज़ारी का एहतमाम फरमाया है। 
📚हमारी अज़ादारी, स33

10
इमाम सादिक (अ.स.) 
ज़ायर ए हुसैन (अ.स.) जब ज़ियारत करके वापस आता है तो उसपर कोई गुनाह बाकी नहीं रहता। 
📚वसाएल उश शिया, ज14, स412, अज़ादारी- 40 हदीस

11
इमाम सादिक (अ.स.) 
वो जो हम पर हुए ज़ुल्म पे ग़मज़ादा हो, उसकी हर सांस तस्बीह है, उसका सोग (मातम) इबादत है।
📚अमाली शेख़ मुफ़ीद,स 338, अज़ादारी- 40 हदीस

12
इमाम महदी (अतफ़श) 
एै जद्द ए बुज़ुर्गवार (इमाम हुसैन (अ.स.))! अगर मैं कर्बला में नहीं था तो अब आप के मसाएब पर ख़ून बहाऊंगा।
📚 हमारी अज़ादारी, स 33

13
इमाम रज़ा (अस)
 जो रोज़ ए आशूरा अपनी (दुनियावी) हाजत तलब करने से परहेज़ करता है, अल्लाह उसकी दुनिया और आख़िरत की हाजत पूरी करता है। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

14
इमाम सादिक (अ.स.) 
अल्लाह अज़्ज़ वा जल ने हर काम का सवाब मुक़र्रर फ़रमाया है मगर हमारी मुसीबत में बहाए जाने वाले आंसुओं की कोई हद नहीं है। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स 179

15
इमाम रज़ा (अस) 
अगर तुम चाहते हो कि हमारे साथ जन्नत के आला मकाम में रहो, तो हमारे ग़म में ग़मगीन रहो और हमारी खुशी में खुश रहो। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

16
इमाम रज़ा (अस)
 जिसके लिए रोज़ ए आशूरा एक मुसीबत, गिरया और बुका का दिन है, अल्लाह अज़्ज़ वा जल, रोज़ ए क़यामत को उसके लिए खुशी और राहत का दिन बनाएगा। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

17
इमाम रज़ा (अस) 
जो शख़्स किसी ऐसी मजलिस में बैठे के जिसमें हमारे 'अम्र' का अहया हो तो क़यामत के दिन उसका दिल ज़िंदा होगा जब के उस दिन हर दिल मुर्दा होगा। 
📚अज़ादारी क्यूं?, स35; हमारी अज़ादारी, स.38

18
रिवायय
 जब इमाम हुसैन (अ.स.) शहीद हो गये तो बैतुल मुक़द्दस के हर पत्थर के नीचे ताज़ा ख़ून पाया जाता था और ये पत्थरों का गिरया था। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स 106

19
इमाम सादिक (अ.स.) 
ऐसा कोई नहीं है जो इमाम हुसैन (अस) के अशआर पढ़े, रोये और दूसरों को रुलाये, मगर ये के अल्लाह उसपर जन्नत वाजिब करे और गुनाह माफ़ करे।
📚 अज़ादारी 40-हदीस

20
इमाम सादिक (अ.स.)
 इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत के बाद समंदर उबल पड़े और ये समंदर का गिरया था, ज़मीन 40 दिन तक स्याह हो गई ये ज़मीन का गिरया था। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स108

21
इमाम सज्जाद (अस)
 हर मोमिन, जो हुसैन (अ.स.) और उनके असहाब के क़त्ल पर ऐसे रोये के आँसू गाल पर बहे, तो अल्लाह उसे जन्नत के ऊँचे महलों में दाख़िल करेगा।
📚 40 हदीस - अज़ादारी

22
इमाम हुसैन (अस) 
मैं आंखों के आंसुओं का मक़तूल हूं। जब मोमनीन के सामने मेरा ज़िक्र किया जाएगा तो वो गिरया करेगा, मेरी मुसीबत पर ग़मीन होगी।
📚 इरफ़ाने मज़्लूम , स9

23
रसूल ख़ुदा (स.अ.व.) 
एै फ़ातिमा (स.अ.), रोज़ ए क़यामत तुम औरतों की शफ़ाअत करना और मैं मर्दों की, और हर अज़ादार ए हुसैन को हम हाथ पकड़ कर जन्नत में ले जायेंगे। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

24
रसूल ख़ुदा (स.अ.व.)
 जिसने दुनिया में अब्दुल मुत्तलिब की औलाद में से किसी के साथ एहसान किया, जब वो मुझे मिलेगा उसका बदला मेरे ज़िम्मे होगा।
📚 सवाइक मुहर्रिक़ा, स 150

25
रसूल ख़ुदा (स.अ.व.)
 एै फ़ातिमा (स.अ.)! रोज़ ए क़यामत हर आँख रोएगी सिवाए उसके जो हुसैन (अस) के ग़म में रोयी हो। यकीनन..उसे जन्नत की नेमतों की बशारत दी जाएगी। 
📚40 हदीस - अज़ादारी

26
इमाम सादिक (अ.स.) 
ऐसा कोई नहीं जो हुसैन (अस) के नौहे पढ़े, खुद रोए और अपने नौहे से दूसरे को रुलाए, मगर ये के अल्लाह उसपर जन्नत वाजिब करे और उसके गुनाह माफ़ करे। 
📚40 हदीस - अज़ादारी

27
इमाम सादिक (अ.स.)
 मैं मजालिस को पसंद करता हूं पस! तुम पर लाज़िम है के हमारे अम्र को जिंदा रखो। अल्लाह  उसपर रहम फरमाये जो हमारे अम्र को जिंदा करे। 
📚क़ुर्बान उश शहादा, स 82

28
इमाम रज़ा (अस)
 अगर तुम इमाम हुसैन (अ.स.) पर इतना रोए कि तुम्हारे गाल पर से आंसू बहे, तो अल्लाह तुमसे हुए सब गुनाह माफ़ करेगा, चाहे वो छोटे हों या बड़े, कम हो या ज़्यादा। 
📚अज़ादारी 40-हदीस

29
इमाम बाकिर (अ.स.) 
जो हमें याद करता है..और उसकी आंख से आंसू बहते हैं तो अल्लाह जन्नत में उसके लिए घर बनाएगा और उन आंसू को उसके और जहन्नुम के बीच में हद बनाएगा।
📚 40 हदीस - अज़ादारी

30
इमाम रज़ा (अस)
 जो शख़्स आशूरा के दिन को अपने लिए मुसीबत, ग़म, गिरया ओ बुका का दिन क़रार दे, अल्लाह ताअला उसके लिए क़यामत के दिन को फ़रहत ओ सुरूर (ख़ुशी) का दिन क़रार देगा। 
📚मीज़ान उल हिक्मा, ज6, स493

31
इमाम सादिक (अ.स.) 
जो शख़्स इमाम हुसैन (अ.स.) के बारे में शेर का एक बैत कहे, खुद भी रोए और 10 दूसरे लोगों को भी रुलाए, तो उसके लिए और रोने वालों के लिए भी जन्नत है।
📚 मीज़ान उल हिक्मा, ज6, स497

32
इमाम रज़ा (अस) 
माहे मोहर्रम आते ही मेरे वालिद इमाम काज़िम (अस) कभी मुस्कुराते नहीं थे, पहले 10 दिन उनपर ग़म और उदासी छा जाती और रोज़ ए आशूरा उनके लिए मुसीबत, ग़म और रोने का दिन होता। 
📚40 हदीस - अज़ादारी

33
इमाम सादिक (अ.स.)
 हज़रते रबाब (स.अ.) ने ह. इमाम हुसैन (अ.स.) का मदीना आ कर इंतेक़ाल करने तक मातम किया और वो दीगर शहज़ादियों के साथ मिल कर इस क़द्र रोईं के आप की आँखों के आँसू ख़ुश हो गए।
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स 125

34
इमाम सादिक (अ.स.) 
ने अबू अमारा से फ़रमाया, "मेरे जद्द की शान में अब्दी का शरे पढ़ो"। जब शरे पढ़ा गया तो इमाम (अस) ने सख़्त गिरया किया यहां तक कि इमाम (अस) के घर से रोने की सदा बुलंद हुई।
 📚अज़ादारी क्यूं?, स37

35
इमाम रज़ा (अस) 
ने शायर कमीत बिन असदी से फ़रमाया, "जब तक अपने अशआर से तुम हमारी (हमारे अम्र की) ता'इद करते रहोगे, ख़ुदा वंदे आलम रुह उल क़ुदस के ज़रिये तुम्हारी मदद करता रहेगा"। 
📚अज़ादारी क्यूं?, स36

36
रिवायत 
जब इमाम सादिक (अ.स.) के सामने इमाम हुसैन (अ.स.) का नाम लिया जाता था तो रात तक आप को हंसते हुए न देखा जाता था और आप फरमाते थे, "हुसैन (अ.स.) हर मोमिन के लिए रोने का सबब है"। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स33

37
इमाम सादिक (अ.स.)
 ने मिस्मा' बिन अब्दुल मलिक से फरमाया, "ख़ुदा तुम्हारे आंसुओं पर रहम फरमाए। तुम उन लोगों में से हो जो हमारी खुशी में खुश होते हैं और हमारे ग़म में ग़मगीन होते हैं"। 
📚क़ुर्बान उश शहादा, स 69

38
इमाम रज़ा (अस) 
अगर तुम ये चाहते हो कि तुम इमाम हुसैन (अ.स.) के साथ जो शहीद हुए उनके जितना सवाब मिले तो जब भी इमाम हुसैन (अ.स.) को याद करो, तो ये पढ़ो "या लयतनी कुन्तो माहुम फ़ा अफ़ुज़ा फ़ौज़न अज़ीमा"। 
📚40 हदीस - अज़ादारी

39
रिवायत
आसमान पर शफ़क़ की सुरखी ( लाली ) इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत से पहले न थी (ये आसमान का गिरया है जो आज भी इमाम हुसैन (अ.स.) की सदाक़त की गवाही दे रहा है)। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, स106

40
रिवायत
 जब (कर्बला के असीरोन का) क़ाफ़िला मदीना पहुन्चा तो इमाम सज्जाद (अ.स.) ने फरमाया, "शहर में जा कर मनादी करो"। ख़ैमे नस्ब हुए, इमाम सज्जाद (अस) के ख़ैमे पर एक स्याह (काला) अलम नस्ब किया गया। 
📚अज़ादारी - अहलेबैत (अ.स.) की नज़र में, हं 153

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