फ़ज़ाएले अमीरुल मोमेनीन अस

अमाली में मुसलिम इब्ने कैस से मरवी है कि ऑहुजूर ने फ़रमाया और हज़रत अली (अस) में जनाबे लूत की नरम मिज़ाजी, जनाबे यहया का हुस्ने इख़लाक़, जनाबे अय्युब का ज़ोहद, जनाबे इब्राहीम की सख़ावत, जनाबे सुलेमान का दबदबा और जनाबे दाऊद की अज़मत है, नामे अली (अ.स) जन्नत के हर दरवाज़े पर मकतूब है। अल्लाह ने मुझे बशारते अली (अ.स.) से नवाज़ा है। अली (अ.स.) अल्लाह के यहाँ महमूद है। मलाऐका के यहाँ पाक वा पाकीज़ है मेरी ख़लवत व जलवत का हमनशीन है। मेरा चिराग़ है, मेरा मूनिस है। मेरा रफ़ीके सफ़र है। अली मुझसे है और मैं अली से हूँ। जिसने अली (स) से तवल्ला किया उसने मुझसे तवल्ला किया। मोहब्बते अली (अ.स.) नेमत है और इताअते अली (अ.स.) फ़ज़ीलत है। मलाऐका कुर्ब अली (अ.स.) के ख़्वाहिशमन्द रहते हैं। जिन अली (अ.स.) के गिर्द तवाफ़ करते हैं। मेरे बाद रूऐ ज़मीन पर हर तबके़ वाले की निसबत अली (अ.स.) इज़्ज़त, फ़ख़्र और रहनुमाई के ऐतबार से अफ़ज़ल और बेहतर होगा।

अली (अ.स.) ना जल्दबाज़ है ना काहिल वा ग़ाफ़ेल। मेरे बाद रूऐ ज़मीन पर अली (अ.स) से अफ़ज़ल कोई मौलूद नहीं होगा। जिस घर में अली(अ.स.) होगा वहाँ बरकतों का नुज़ूल होगा। अल्लाह ने अली (अ.स.) पर हिकमत व इल्म बारिश की तरह नाज़िल फ़यमाऐं हैं।

मलाऐका अली (अ.स) के हमनशीन होते हैं। अली ज़ीनते महज़ है। अली (अ.स) लशकर की शान है। अली (अ.स) की बदौलत रूऐ ज़मीन पर शादाबी है। अली (अ.स) की वजह से फ़ौज का वक़ार होता है। अली (अ.स.) काबे की मीनार हैं जिसकी ज़ेयारत को लोग आते हैं लेकिन वह किसी की ज़ेयारत को नहीं जाता।

अली (अ.स) चौदहवी का चाँद हैं जो तारीकी ज़लालत को मुनव्वर करता है। अली (अ.स) दोपहेर का आफ़ताबे जवान हैं जिसकी रौशनी से कुरै अर्ज़ मुनव्वर है। अली (अ.स) की तारीफ़ कुरआन में है। आयाते कुरआन अली (अ.स) की कसीदा ख़वान है। अली (अ.स.) ज़िन्दगी में करीम और मौत में शहीद हैं।
📚हयाते अमीरुल मोमेनीन अस (अज़-दमाअस साक़ेबा)

फ़ज़ीलते अमीरुल मोमेनीन अस #पार्ट_2👇🏻

📚अमाली में शेख़ सदूक़ में अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास से मरवी है कि ऑहुजूर(स.अ.ग.) ने फ़रमाया है कि जिब्राईल ने मुझे आकर बताया है कि इरशादे कुदरत है। अली (स) मेरी मोहब्बत को काऐम करने वाला है। अली (अ.स) के मवाली को कभी अज़ाब नहीं करूँगा। अली (अ.स) के दुशमन को कभी मुआफ़ नहीं करूँगा। फिर आपने फ़रमाया: क़यामत के दिन जिब्राईल मेरे पास 'लवा अलहम्द' लाऐगा जिसके 70 टुकड़े होंगे हर टुकड़ा सूरज से बड़ा होगा। मैं जिब्राईल से लेकर 'लवा-अलहम्द' अली के सुपुर्द कर दूँगा। एक शख़्स ने खड़े होकर अर्ज़ किया जब 'लवा अलहम्द' इतना बड़ा होगा तो अली (अस) उसको उठाऐगा कैसे?
ऑहुजूर ने नाराज़ होकर फ़रमाया तुम्हें क्या मालूम उस दिन अली (स) की ताकत क्या होगी। उस दिन अली (अ.स) में जिब्राईल की ताकत, यूसुफ़ का जमाल, रिज़वाने जन्नत का हिल्म, और जनाबे दाऊद का लहन होगा। अली (अ.स) पहला वह शख़्स होगा जो आपकी सबील से सेराब होगा। अली(अ.स) और शिआयाने अली के मरातिब इतने होंगे जिन पर अव्वलीन और आख़ेरीन के सालेह अफ़राद रशक करेंगे।

📚हयाते अमीरुल मोमेनीन अस (अज़-दमअतुस साक़ेबा)

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