विलादते बासअदत इमामे ज़ैनुलआबेदीन अलैहिस्सलाम

हज़रत अली इब्ने अबितालिब अलैहिस्सलाम कुफ़े में मसनदे ख़िलाफ़त पर तशरीफ़ फ़रमा थे। जब 15 जमादी उल सन 38 हिजरी में इमामे आली जनाबे सय्यदे सज्जाद अलैहिस्सलाम की विलादत हुई। आप अलैहिस्सलाम के दादा हज़रते अली इब्ने अबितालिब अलैहिस्सलाम और सारे ख़ानदान के लोग इस मौलूद को देख कर बहुत खुश हुए और शायद अली अलैहिस्सलाम ने पोते में अपने ही खोद व ख़्याल देख कर उनका नाम अपने इस्मे मुबारक पर अली रखा था। इमामे जैनुलआबेदीन अलैहिस्सलाम का इल्म आले रसूल अलैहिस्सलाम का इल्म है और आले रसूल अलैहिस्सलाम का इल्म उनके जद्दे अमजद वाला ही का इल्म है के जो बेटे को बाप से बाप को जद्दे अमजद से और जद्दे अमजद को जिब्राईल अलैहिस्सलाम से और जिब्राईल अलैहिस्सलाम को परवरदिग़ार से मिला है। अहले सुन्नत और शिया उलेमा ने इमामे जैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम से बहुत से उलूम दुआएं (सहीफ़ा ए सज्जादिया) नसीहत भरी बातें, तफ़सीर, हलाल ओ हराम के शरअई अहकाम और मुख़्तलिफ़ उलूम को नक़ल किया है। इमामे ज़ैनुलआबेदीन अलैहिस्सलाम से नक़ल होने वाली हदीस या किसी क़ौल को इमाम ने किसी सहाबी या ताबअई से नक़ल नहीं किया बल्कि इन सब चीज़ों का मसदर रसूले ख़ुदा स.अ.व.व. हैं। बेशक तमाम लोग उलूम में अहलेबैत अलैहिस्सलाम के दर के मोहताज हैं और अहलेबैत अलैहिस्सलाम किसी के भी मोहताज नहीं। विलादते बासअदत इमामे ज़ैनुलआबेदीन अलैहिस्सलाम के पुर मसर्रत साअतों में हुज्जते ख़ुदावंद इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम की बारग़ाह में मुबारकबाद पेश करते हैं। (अमहट अज़ादारी)

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