दुआ ए रोज़े हफ़्ता सनीचर तर्जुमा
दुआ ए रोज़े हफ़्ता (सनीचर) तर्जुमा 👇🏻
بِسْمِ اللهِ الرَّحْمٰن الرَّحِيْمِ
मदद अल्लाह तआला के नाम से जो हिफ़ाज़त चाहने वालों का कलमए कलाम और पनाह ढूंढ़ने वालों का विरदे ज़बान है। और खुदा वन्दे तआला से पनाह चाहता हूं सितमगारों की सितमरानी, हासिदों की फ़रेबकारी और ज़ालिमों के ज़ुल्म नारवा से। मैं उसकी हम्द करता हूं (और सवाल करता हूं कि वह इस हम्द को) तमाम हम्द करने वालों की हम्द पर फ़ौकियत दे। बारे इलाहा! तू एक अकेला है। जिसका कोई शरीक नहीं। और बगैर किसी के मालिक बनाए तू मालिक व फ़रमांरवा है। तेरे हुक्म के आगे कोई रोक खड़ी नहीं की जा सकती और न तेरी सल्तनत व फ़रमांरवाई में तुझसे टक्कर ली जा सकती है। मैं तुझसे सवाल करता हूं कि तू अपने अब्दे खास और रसूल स० हज़रत मोहम्मद पर रहमत नाज़िल फ़रमा और अपनी नेअमतों पर ऐसा शुक्र मेरे दिल में डाल दे जिससे तू अपनी खुशनूदी की आख़री हद तक मुझे पहुंचा दे। और अपनी नज़रे इनायत से एताअत, इबादत की पाबन्दी और सवाब का इस्तेहकाक हासिल करने में मेरी मदद फ़रमाए और जब तक मुझे ज़िन्दा रखे गुनाहों से बाज़ रखने में मुझ पर रहम करे। और जब तक मुझे बाकी रखे उन चीज़ों की तौफ़ीक दे जो मेरे लिये सूदमन्द हों और अपनी किताब के ज़रिये मेरा सीना खोल दे और उसकी तलावत के वसीले से मेरे गुनाह छांट दे और जान व ईमान की सलामती अता फ़रमाए और मेरे दोस्तों को (मेरे गुनाहों के बाएस) वहशत में न डाले और जिस तरह मेरी गुज़िश्ता जिन्दगी में एहसानात किये हैं उसी तरह बकिया ज़िन्दगी में मुझ पर अपने एहसानात की तकमील फ़रमाए। ऐ रहम करने वालों में सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।
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