करबला की मुख़्तसर तारीख़ और रौज़ा ए अब्बास अलैहिस्सलाम की तामीर
करबला की मुख़्तसर तारीख़ और रौज़ा ए अब्बास अलैहिस्सलाम की तामीर
अल्लामा अब्दुल रज़्ज़ाक मौलवी अपनी किताब क़मर बनी हाशिम तबअ नजफ़े अशरफ़ के स० 114 पर तहरीर फ़रमाते हैं कि हजरत अब्बास के लाशे को इमाम हुसैन के गंजे शहीदा तक न ले जाने की दो ही वजहें अरबाबे मक़ातिल ने तहरीर की हैं। एक यह कि उनका जिस्म इस दर्जे पारा पारा था कि इमाम हुसैन उसे उठा ही न सके दूसरे यह कि हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम ने वसीयत की थी कि मेरी लाश ख़ैमे तक न ले जायी जाये क्योंकि मैंने सकीना से पानी का वादा किया था और उसे पूरा न कर सका। लिहाज़ा मुझे उससे शर्म आती है। यह दोनों वजहें दुरूस्त नहीं हैं, क्योंकि हज़रत इमाम हुसैन हर हाल में लाशे को ख़ैमे में ले जा सकते थे। वह इमामे वक़्त थे, उनके यह राय कायम करना कि वह लाश को ले जाने पर क़ादिर ही न हो सके यह दुरूस्त नहीं है। अस्ल वजह यह है कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम यह चाहते थे कि हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का लाशा अलाहिदा ही दफ़्न हो ताकि उनका मक़बरा अलाहिदा ही तामीर किया जाये और जलालत व अज़मते शहादत के बाद भी ता क्यामे क़यामत कायम रहे। मैं कहता हूं कि मज़कूरा वजूहात कसीर कुतुब मक़ातिल में मौजूद हैं। लेहाज़ा इन्हें नज़र अन्दाज़ नहीं किया जा सकता। मेरे ख्याल के मुताबिक अल्लामा अब्दुल रज़्ज़ाक ने जो वजह बयान की है उसे दोनों वजूह के साथ तीसरी वजह कार देनी चाहिये।
📚ज़िकरुल अब्बास अलैहिस्सलाम, अल्लामा नजमुल हसन करारवी साहब मरहूम
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