इमामे मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम

हज़रत इमाम मोहम्मद बाकर (अ.स.)

इमाम जैनुल आबिदीन (अ.स.) के बाद इमाम मो. बाक़िर (अ.स.) इमाम हुए। आप भी अपने आबा व अजदाद की तरह इमाम मनसूस, मासूम और अफज़ले कायनात थे। "अल्लामा इब्ने हजरे मक्की" लिखते हैं कि आप इबादत इल्मो ज़ोहद वगैरा में हज़रत इमाम जैनुल आबिदीन (अ.स.) की जीती जागती तस्वीर थे (📚सवायके मुहर्रिका पेज 120)
इसी तरह दीगर रावियों ने भी इमाम मो. बाकर (अ.स.) के फज़ायल व कमालात बयान किये हैं। आपकी ज़ाते अक़दस से सारी दुनिया फैज़याब हो रही थी मगर दुश्मनों की दुश्मनी में कोई कमी नहीं हुई। और बादशाहे वक़्त हश्शाम बिन अब्दुल मलिक ने आपको ज़हर दिलवा कर शहीद करा दिया। आप की तारीख़े शहादत 07 ज़िल्हिज 114 हिजरी पीर के दिन मदीने में हुई। आप जन्नतुल बक़ी में दफ़्न हैं। (📚कश्फुलगम्मा पेज 93, जिलाउल उयून पेज 264)

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