इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम

हजरत इमाम अली रिजा (अ.स.)

इमाम मूसा काज़िम (अ.स.) के बाद इमाम अली रिज़ा (अ.स.) इमाम हुए। आप रसूले ख़ुदा सअवव के आठवें जानशीन और इस्मत के सिलसिले की दसवीं कड़ी थे। आप भी मासूम मिनल्लाह और अफज़ले कायनात थे।

"अल्लामा इब्ने हजरे मक्की" कहते हैं कि आप तमाम लोगों में जलीलुल कद्र और अज़ीमुल मर्तबत थे। (📚सवायके मोअर्रिका पेज 122)

"अल्लामा अब्दुल रहमान जामी" के मुताबिक आप की बातें पुर अज़ हिक़मत और आप का अमल दुरूस्त और किरदार महफूज़ अनिल ख़ता था आप इल्मों हिक़मत से भर पूर थे रूए ज़मीन पर आप की मिसाल नहीं थी। (📚शवाहिदुन्नबूवत पेज 196 तबए लखनऊ 1904)

"अल्लामा शहीर" लिखते हैं कि "आप अशरफ़े मख्लूके ज़माना थे (हबीबुल यसीर) आपको इल्मे माकाना व मायकू न आवा व अजदाद से वरासतन पहुँचा था। (📚वसीलतुन्नजात पेज 377) आप हर ज़बान और हर लुगत में फसीह और दाना तरीन मर्दुम थे। जो शख़्स जिस ज़बान में बात करता था उसको उसी ज़बान में जवाब देते थे (📚रौज़तुल अहबाब)

"अल्लामा मो. तलहा शाफ़ई" के मुताबिक "आप बारह इमामों में तीसरे अली हैं। आप का ईमान हद से बढ़ा हुआ था। आपकी शान इन्तिहा को पहुँची हुई थी, आप का कसे फ़ज़ीलत निहायत बुलन्द था और आप के इम्कानाते करम निहायत वसीअ थे, आप के मददगार बेशुमार और आप के ब्राहीने शरफ़ो इमामत निहायत रोशन थे। ख़लीफ़ा मामून रशीद ने अपनी हुकूमत में शरीक किया खलीफ़-ए-हुकूमत बनाया और अपनी लड़की की शादी आपके साथ कर दी। आप के मनाकिब व सिफ़ात निहायत बुलन्द आप के मकारिम और अख़लाक निहायत अज़ीम थे बस मुख़्तसिर ये कि सिफाते हसना की जो मन्ज़िलें थी उन से आप का दर्जा बुलन्द था। (📚मतालिबुल सऊल पेज 252)

इतने सिफ़ातो कमालात के ऐतेराफ के बावजूद ख़लीफा मामून अब्बासी ने आप को ज़हर देकर शहीद कर दिया। 23 ज़ीक़ादह सन् 203 हिजरी (जुमा) को मुताबिक 818 ई० शहरे "तूस" में आप की शहादत हुई (📚जिलाउल उयून पेज 280)

हालते सफ़र में आप शहीद हुए इस लिये आप के पास उस वक़्त अज़ीज़ो अक़ारिब, औलाद वगैरा में से कोई नहीं था। इसी लिये गरीबुल ग़ोरबा कहा जाता है। मामून रशीद ने ब इसरार तीन अंगूर ज़हर आलूद खिलाये थे। आप तीन दिन तड़पते रहे आख़िर में शहादत पाई। इमाम मो० तकी (र्फज़ंद) बा एजाज़ तशरीफ़ लाये और नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई और वापस चले गये। इसके बाद शहरे "तूस" महेल्ला "सनाया" में आपको दफ़्न किया गया जो मशहदे मुकददस के नाम से मशहूर है।

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