इमामे अली नक़ी अलैहिस्सलाम

हजरत इमाम अली युन्नकी (अ.स.)

हजरत इमाम मोहम्मद तक़ी (अ.स.) के बाद हजरत इमाम अली नक़ी (अ.स.) इमामे मासूम मिनल्लाह हुए जो रसूले ख़ुदा सअवव के दसवें जानशीन और इस्मती सिलसिले की बारहवीं कड़ी थे। आप भी अपने आबा व अजदाद की तरह से आलमे ज़माना और अफ़ज़ले कायनात थे।

आप इल्म, सख़ावत, तहारते नफ़्स, किरदार की बुलन्दी और जुमला सिफाते हसना में अपने वालिद माजिद की जीती जागती तस्वीर थे। (📚सवायके मोहर्रिका पेज 123 मतालिबुल सऊल पेज 291, नूरूल अबसार पेज 149)

आपकी विलादत बा सआदत सन् 214 हिजरी में हुई थी। उस वक्त मामून अब्बासी बादशाह था उसका सन् 218 हिजरी में इन्तिक़ाल होने पर मोतसिम बादशाह हुआ। सन् 227 हिजरी में वासिक इब्ने मोतसिम ख़लीफा हुआ जिसका सन् 232 हिजरी में इन्तिक़ाल हो गया और मुतवक्किल अब्बासी ख़लीफा हुआ। सन् 247 हिजरी में इसका बेटा मुनतसिर और 248 हिजरी में मुसतईन 252 हिजरी में जुबैर इब्ने मुतवक्किल अल-मकनी व मोतिज़ बल्लाह अलल तरतीब ख़लीफा हुए। ये सब के सब अजली दुशमनाने अहले बैत थे। जिन्होंने इमाम अलीयुन्नकी (अ.स.) को सुकून से नहीं रहने दिया।

इन सब में मुतवक्किल बड़ा ज़ालिम व जाबिर था उसे बनी अब्बास का यज़ीद कहा गया है इसने आले मोहम्मद की कब्रों तक को मिस्मार करा दिया था। इस ने इमाम अली नकी (अ.स.) को बुलवा कर क़ैद किया था, ता हयात क़ैद में रखा।

मुत्तवक्किल के बाद उसका बेटा मुसतनसिर, फिर मुस्तईन फिर सन् 242 हिजरी में मोतिज़ बिल्लाह ख़लीफा हुआ वह अपने बाप की सीरत पर चलते हुए इमाम के साथ सख़्ती ही करता रहा ओर आख़िर में आप को ज़हर दे दिया। आप तारीख़ 3 रजब सन् 254 हिजरी में यौमे दोशंबा शहीद हुए। इमामे हसन असकरी ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई। सामरा में दफ़्न हुए।

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