मुबाहिला क्यों और कैसे हुआ था ?
मुबाहिला क्यों और कैसे हुआ था ?
🔹इस अंदाज़ में अहलेबैत अस मैदाने मुबाहिला में जलवा अफ़रोज़ हुए।
فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (क़ुरआन) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो के (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को (बुलाएं) और तुम अपनी जानों को उसके बाद हम सब मिलकर ख़ुदा की बारग़ाह में गिड़गिड़ाएं और झूठों पर ख़ुदा की लानत करें।
پھر جب تمہارے پاس علم (قرآن) آچکا اس کے بعد بھی اگر تم سے کوئی (نصرانی) عیسیٰؑ کے بارے میں حجت کرے تو کہو کہ (اچھا میدان میں) آؤ ہم اپنے بیٹوں کو بلائیں تم اپنے بیٹوں کواور ہم اپنی عورتوں کو(بلائیں) اور تم اپنی عورتوں کو اور ہم اپنی جانوں کو (بلائیں) اور تم اپنی جانوں کو اسکے بعد ہم سب مل خدا کی بارگاہ میں گڑ گڑائیں اور جھوٹوں پر خدا کی لعنت کریں۔
📚सूरा ए आले इमरान,आयत 61
✍️अल्लामा ज़म्ख़शरी ने आयते मुबाहिला के तहत लिखा के
"हज़रते रसूले ख़ुदा (सअवव) सुबह सवेरे मुबाहिला के लिए आये और इस तरह आये के हुसैन अस को गोद में उठाए हुए और हसन अस का हाथ पकड़े हुए थे और हज़रते फ़ातिमा सा रसूले ख़ुदा के पीछे चल रहीं थीं और अली अस हज़रते फ़ातिमा सअ के पीछे थे और रसूले ख़ुदा सअवव (अपनी आल से) ये कहते हुए आ रहे थे "जब मैं दुआ करूं तो तुम आमीन कहना"
ये देख कर ईसाइयों के सबसे बड़े पादरी ने कहा" एै नसरानियों मैं ऐसे चेहरे देख रहा हूं के अगर अल्लाह चाहे तो इन चेहरों के लिए पहाड़ को अपनी जगह से हटा दे चुनांचे उन से हरगिज़ मुबाहिला ना करना वरना हलाक व बर्बाद हो जाओगे और रूए ज़मीन पर क़यामत तक कोई नसरानी नहीं बचेगा।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें