इबादते इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम
इमामे हुसैन (अ.स.) की इबादत :-
इमामे हुसैन (अ.स.) आबिदे शब ज़िन्दादार थे। बेशुमार नमाज़े पढ़ते थे। दिन भर रोज़ा रहते थे। मदीना-ए-मुनव्वरा में क्याम के ज़माने में 25 हज पा प्यादा किये। इराक में कयाम के दौरान बनी उम्मैया की हंगामा अराइयों की वजह से आपको हज करने का मौका नहीं मिला। (📚असदुल गाबा जिल्द 3 पेज 27)
शौके इबादत का सबसे बड़ा मुज़ाहिरा कर्बला के मैदान में हुआ जब आपने 9 मोहर्रम को फौजे यज़ीद से एक शब की मोहलत सिर्फ़ ख़ुदा की इबादत के लिये माँगी थी। रावी लिखता है कि इमाम हुसैन (अ.स.) के खेमों से तसबीहो तहलील की अवाज़े इस तरह आ रही थी जैसे शहद की मक्खियों के छत्ते से भनभनाहट की आवाज आती है।
इमामे हुसैन (अ.स.) के शौके इबादत और बन्दगी की मेराज वह सजदा है जो उन्होंने तीन दिनों की भूख और प्यास की हालत में शिम्र मलऊन के कुन्द ख़न्जर के नीचे अदा किया और ख़ुदा ने उन्हें नफ़्से मुतमेइन्ना की सनद अता फरमाई।
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