इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में अकवाले रसूल सअवव
इमाम हुसैन (अ) की शान में अकवाले रसूल (स)
इमामे हसन (अ.स.) और इमामे हुसैन (अ.स.) दोनों के लिये रसूले इस्लाम की हज़ारो बल्कि बेशुमार हदीसों व अकवाले रसूले (स.अ.) से किताबें भरी पड़ी है। हमारे बुर्जुग व बुलन्द मर्तबा उलमाये केराम ने अपनी पूरी पूरी उम्र इस काम में सर्फ कर दी हैं। अगर उनका मुखतसिर ज़िक्र किया जाय तो मुकम्मल किताब की ज़रूरत है जो यहाँ पर मुमकिन नहीं है। फिर भी इमामे आली मुकाम की अज़मत व मर्तबा और पेशे खुऊदा उनका मकाम व शानो शौकत की महज़ एक झलक के तौर पर चन्द हदीसों व अक्वाले रसूल (स.अ. ) पेश किये जा रहे हैं। (सब तर्जुमे हैं)
1- परवरदिगार मैं हुसैन को दोस्त रखता हूँ। तू भी उसे और उसके दोस्तों को दोस्त रखना। (📚मुसनद अहमद इब्ने हम्बल)
2- मैं अहले बैत से जंग करने वाले के लिये सरापा जंग और सुलह करने वाले के लिये सरापा सुलह हूँ। (📚मसनद अहमद)
3- हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन (अ.स.) से हूँ। परवरदिगार हुसैन (अ.स.) के दोस्त को दोस्त रखता है। (📚मसदन अहमद)
4- हसन (अ.स.) और हुसैन जन्नत के जवानों के सरदार है। (📚मसनद)
5- जो सरदारे जवानाने जन्नत को देखना चाहता है वह हुसैन (अ.स.) को देखे। (📚मसनद अहमद)
6- हसन (अ.स.) और हुसैन (अ.स.) दुनिया में मेरे दो फूल हैं। (📚मसनद अहमद)
7- मेरे तमाम घराने में सबसे ज़्यादा महबूब हसन (अ.स.) और हुसैन (अ.स.) हैं। (📚तिरमिज़ी)
8- जो हसन (अ.स.) व हुसैन (अ.स.) को दोस्त रखेगा वह मेरा दोस्त और जो इनसे बुग्ज़ रखेगा वह मेरा दुश्मन है। (📚अबू साद)
9- मुझे हुसैन (अ.स.) के रोने से तकलीफ़ होती है। (📚इब्ने मनीअ)
10- जो हसन (अ.स.), हुसैन (अ.स.) उनके बाप और उनकी मादरे गिरामी से मोहब्बत करेगा वह जन्नत में मेरे साथ होगा। (📚मसनद अहमद)
11- हुसैन (अ.स.) तुम सैय्यद इब्ने सैय्यद, बरादरे सैय्यद, इमाम इब्ने इमाम, हुज्जत इब्ने हुज्जत और ब्रादरे हुज्जत हो। (📚मोवददतुल कुंबा)
12- हुसैन (अ.स.) मेरा पार-ए-जिगर है, जो इसे और इसकी औलाद को दोस्त रखेगा उसके लिये तूबा है और इसके क़ातिल के लिये जहन्नुम। (📚मवददतुल कुर्बा)
13- मेरा हुसैन (अ.स.) सर ज़मीने "तुफ्" पर शहीद होगा और ये उम्मत मेरे बाद फितने में मुबतिला हो जायेगी। (📚जमउल फायद)
14- मैंने हसन (अ.स.) और हुसैन (अ.स.) के नाम इस लिये रखे कि ये नाम जन्नती नाम है। (📚ईजाह बगवी)
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