इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम की वसीयत इमामे सज्जाद अलैहिस्सलाम के नाम ?
⭕बाज़ लोग इमामे सज्जाद अलैहिस्सलाम को (बीमार) के लक़ब से याद करते हैं जबके आप की बीमारी वाक़ेआ ए आशूरा के चंद दिनों तक महदूद थी आप कोई दाएमी मरीज़ नहीं थे हर आदमी अपनी ज़िंदगी में कभी ना कभी बीमार हो ही जाता है अगरचे आप की इस बीमारी में भी मसलेहत और हिकमते इलाही पोशीदा थी इस के ज़रिए आप से जेहाद और देफ़ा की ज़िम्मेदारियां उठा लेना मक़सूद था ताके आईंदा अमानत और इमामत की आज़मी ज़िम्मेदारियों को अपने कांधों पर उठा सकें और अपने वालिदे बुज़ुर्गवार (की शहादत) के बाद 34 या 35 साल तक ज़िंदा रहते हुए शियों की इमामत के इस सख़्त और पुरआशोब दौर को गुज़ार सकें। यही वजह है के इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम ने मैदाने जंग में जाने से पहले जो अहेम काम अंजाम दिए उन में से एक वादा और अमानते इमामत और मिरासे रसूल अकरम सअवव को अपने बाद वाले इमाम, इमामे सज्जाद अलैहिस्सलाम के सुपुर्द करना था। अबुल जारुद ने इस बारे में इमामे बाक़िर अलैहिस्सलाम से नक़ल किया है के आप ने फ़रमाया "जब शहादते इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम का वक़्त आ पहुंचा तो आप ने अपनी बेटी फ़ातिमा (सअ) को बुलाया और एक लिपटी हुई तहरीर जो ज़ाहिरा वसियत थी उ...