इमाम हुसैन (अ.) की शहादत से पहले
🌐इमाम हुसैन (अ.) की शहादत से पहले
१. तबरानी ने हज़रत आयशा से नक़्ल किया कि उन्होंने कहाः- “रसूल अल्लाह (स.) ने फ़रमाया कि जिबरईल ने मुझे यह ख़बर दी है कि मेरा फ़रज़न्द हुसैन मेरे बाद ज़मीने तफ (कर्बला) पर क़त्ल किया जायेगा और मेरे पास ख़ाके तुर्रबत लाये जहां हुसैन का मरक़द (क़ब्र) होगा"।
२. अबु दाऊद व हाकिम ने अमुलफज़ल बिन्त हारिस से रवायत की है :- "रसूल अल्लाह (स.) ने फ़रमाया मेरे पास जिबरईल आए और यह ख़बर दी कि मेरी उम्मत मेरे बाद मेरे हुसैन को क़त्ल करेगी और उन्होंने कुछ खून आलूद सुर्ख मिट्टी मुझे दी" ।
३. अहमद ने रेवायत की है कि :-
"नबीए अकरम ने फरमाया कि मेरे घर पर एक ऐसा फर्शिता आया जो पहले कभी नहीं आया था, उसने मुझसे कहा कि, आपका नवासा हुसैन करबला में कत्ल किया जायेगा। अगर आप चाहें तो इस जगह की ख़ाक आपको दिखा दूँ जहाँ वह कत्ल होगा फिर उसने सुर्ख मिट्टी मुझे दी।
४. बग़वी ने अनस की हदीस से ऐखराज किया है :
"फरिश्तए बारान ने परवर दिगारे आलम से इजाज़त ली कि वह नबीए अकरम (स.) की ज़्यारत करेगा उस वक़्त हुजूर उम्मे सलमा के घर में थे। फरमाया कि ऐ उम्मे सलमा दरवाज़े पर निगरा रहो कि कोई अन्दर दाखिल हो इतने में हुसैन आ पहुँचे। रसूल ने हुसैन को गोद में उठा लिया और चूमने लगे, मलक ने पूछा या रसूल अल्लाह, आप इनसे मुहब्बत रखते हैं ? रसूल ने फरमाया हाँ तो मलक रंजीदा हुआ और कहने लगा कि आपकी उम्मत इसे कत्ल करेगी अगर आप चाहें तो वह दिखा दूँ। फिर मलक ने वह जगह दिखाई और सुर्ख़ रंग की ख़ाक उसने दी जिसे रसूल अल्लाह ने उम्मे सलमा के हवाले करते हुये फरमाया कि इसे ऐहतियात से रखो "।
इस रेवायत को अबुहातिम ने भी अपनी सहीह में दर्ज किया है। अहमद की रेवायत में है कि ख़ाक एक मुट्ठी से कुछ कम थी।
५. हाकिम और बेहक़ी ने उम्मूलफज़ल दुख़्तरे हारिस से रेवायत की है :-
"उम्मुलफज़ल कहती हैं कि मैंने इमाम हुसैन को लाकर रसूल अल्लाह की गोद में डाल दिया अब जो देखा तो हुजूर की आँखों से अश्क (आँसू) जारी हैं। मैंने सबब पूछा, आपने फरमाया कि अभी मेरे पास जिबरईल आऐ थे मुझे ख़बर दे गये हैं कि मेरे बाद मेरी उम्मत मेरे इस फरज़न्द को तीन दिन का भूखा प्यासा कत्ल कर देगी"।
६. इब्ने राहविया बेहकी और अबूनईम ने ऐखराज किया है कि :-
"उम्मे सलमा फरमाती हैं कि एक दिन रसूल अल्लाह सो रहे थे बेदार (जागे) हुए तो बेहद मुज़तरिब और बेचैन थे। इनके हाथ में सुर्ख मिट्टी थी जिसे आप चूम रहे थे। मैंने पूछा या रसूल अल्लाह! यह ख़ाक कैसी है फरमाया, यह ख़ाक मरदे हुसैन की है अभी जिबरईल आये थे उन्होंने मुझे ख़बर दी है कि मेरा फरज़न्द हुसैन इराक की सरज़मीन पर कत्ल किया जायेगा"।
७. अबूनईम और बेहकी ने अनस से लिया है कि :-
“ पानी का फरिश्ता रसूल अल्लाह की ख़िदमत में हाज़िर हुआ इतने में हुसैन भी आ गये और रसूल अल्लाह के शाने पर सवार हो गये। मलक ने कहा या रसूल अल्लाह आप हुसैन को महबूब रखते हैं मगर अफ़सोस है कि आपकी उम्मत इसे कत्ल कर देगी। अगर आप चाहें तो मैं वह जगह दिखा दूँ। फिर इस फरिश्ते ने ज़मीन पर एक ज़रब लगाई और करबला का मन्जर रसूल अल्लाह के सामने आ गया। फिर रसूल अल्लाह ने एक मुट्ठी ख़ाक उम्मे सलमा की गोद मे डाल दी और फरमाया इसे हिफाज़त से रखो "।
८. अबूनईम उम्मे सलमा से रेवायत करते हैं :-
फरमाया उम्मे समला ने कि हसन (अ.) और हुसैन (अ.) दोनों मेरे घर में खेल रहे थे और रसूल अल्लाह भी तश्रीफ फरमा थे कि इतने में जिबरईले अमीन आये और बोले या मुहम्मद ! आपकी उम्मत आपके फरज़न्द हुसैन को कत्ल करेगी और सुर्ख़ रंग की मिट्टी दी। हुजूर ने इसे सूँघा और फरमाया कि इसमें बूए करबला है और फरमाया उम्मे सलमा देखो जब यह मिट्टी खून हो जाये तो समझ लेना कि मेरा फरज़न्द हुसैन कत्ल कर दिया गया मैंने इस मिट्टी को एक शीशे में महफूज़ कर लिया "।
६. इब्ने असाकर ने मुहम्मद बिन उमर बिन हसन से नकल किया है कि :- हम लोग हुसैन बिन अली के हमराह शत्ते फरात पर थे। हुसैन ने शिमर को देखा और फरमाया सच कहा है अल्लाह और उसके रसूल ने। आं हज़रत ने फरमाया था कि मैं एक चितले कुत्ते को देख रहा हूँ जो मेरे अहले बैत के खून में मुँह डाले है"।
१०. इब्नुलसिकन बग़वी ने किताबे सहाबा में लिखा है और अबुनईम ने अनस बिन हारिस से नक़्ल किया है कि :- “ मैंने रसूल अल्लाह को यह कहते सुना कि मेरा फरज़न्द इस ज़मीन पर जिसे करबला कहते हैं कत्ल किया जायेगा और तुम लोगों में जो उस समय मौजूद हो उसकी मद्द करे। अनस करबला पहुँचे और हुसैन के साथ कत्ल हुये "।
११. बेहकी ने उम्मे सलमा से नकल किया है :- "हुसैन (अ.) रसूल अल्लाह के पास पहुँचे जब कि जिबरईल अमीन भी वहाँ मौजूद थे। जिबरईल ने कहा या रसूल अल्लाह (स.) अनक्रीब आपकी उम्मत इन्हें कत्ल करेगी अगर आप चाहें तो मैं इस सरज़मीन की ख़बर दूँ जहाँ यह कत्ल किये जायेंगे। फिर जिबरईल ने करबला की तरफ इशारा किया और सुर्ख मिट्टी रसूल अल्लाह को दी"।
१२. बेहकी शाअबी से नकल करते हैं कि :- " इब्ने उमर मदीना आये और इन्हें ख़बर मिली कि इमाम हुसैन (अ.) इराक की तरफ मुतवज्जेह हैं तो इब्ने उमर ने दो रातों की मसाफ़त पर इमाम से मुलाकात की। और आपको इराक जाने से मना किया। इमाम ने फरमाया कि जो मैं जानता हूँ तुम नहीं जानते। यह मुमकिन नहीं है कि मैं अपना इरादा मुलतवी कर सकूँ। तब इब्ने उमर ने इमाम को अपनी आगोश में लेकर कहा मैंने आपको खुदा के हवाले किया, आप कतील व शहीद होंगे"।
१३. यहया हज़रमी ने अबूनईम से ऐखराज किया है किः-"सफरे सिफ़्फ़ीन में वह हज़रत अली के हमराह थे जब आप नैनवा के मुकाबिल पहुँचे तो फरमाया ऐ. अबुअब्दुल्लाह "हुसैन” (अ.) नहरे फरात पर सब्र करना क्योंकि रसूल अल्लाह (स.) ने यह ख़बर दी है कि हुसैन शत्तेफात पर कत्ल होंगें "।
१४. अस्बग बिन नबाता से अबुनईम ने लिया है कि वह बोले :- हम लोग अली (अ.) के साथ जब करबला पहुँचे तो हज़रत एक जगह बैठ गये और फ़रमाया कि यह वही जगह है जहाँ मेरा फरज़न्द कत्ल होगा और यहीं मेरे फरज़न्द (हुसैन अ.) की कब होगी जिस पर आसमान व ज़मीन गिरया करेंगे"।
इमामे मज़लूम की शहादत से मुताल्लिक आसमानी ख़बरें और इरशादाते नबवी (स.) मोअर्रिख़ीन की किताबों में मशहूर व मुतवातिर हैं जिनसे इन्कार की कोई गुंजाईश नहीं है ........।
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