हज़रते हुर अलैहिस्सलाम के फ़रज़न्दों का तअर्रुफ़
💠हज़रते हुर अलैहिस्सलाम की औलाद
हज़रते हुर्र की कई औलादें थी। अली इब्ने हुर्र ने करबला में शहादत पाई हजर इब्ने हुर्र को इमाम हुसैन अलै० पर पानी बन्द करने के लिये चार हज़ार का लश्कर दे कर भेजा गया था। लेकिन जब इब्ने ज़ियाद को मालूम हुआ कि हुर्र इमाम हुसैन अलै० की तरफ झुक रहा है तो फौरन शीस इब्ने रबीअ को एक लश्करे गरों के हमराह करबला में बन्दिशे आब के लिये भेजा और इब्ने हुर्र पर भी उसे निगरॉ कार दिया।
मातीन 351 हिजरी में है कि हज़रते हुर्र के लश्करे उमरे सअद लई के निकल आने के बाद हजर इब्ने हुर्र भी निकल आये और उन्होंने हज़रत इमामे हुसैन अलै० से इजाज़त हासिल करके लश्करे उमरे सअद लई पर हमला किया और घमासान की जंग में 120 दुश्मनों को कत्ल करके शहीद हुये उन की शहादत के बाद इमाम हुसैन अलै० ने चाहा कि उन की लाश उठायें मगर दुश्मनों ने मज़ाहेमत बिल आखिर इमाम हुसैन अलै० ने जंग आज़माई शुरू की आठ सौ दुशमनों .को कत्ल करके लाशा-ए- हजर बिन हुर्र को खेमे तक पहुँचाया।
अबीदुल्लाह इब्ने हुर्र क्रमकाम में है कि इस का शुमार शुजाआने अरब में था। उस ने जंगे सिफ्फीन में माविया के साथ हज़रत अली के लश्कर से जंग की। आप की शहादत के बाद कूफ़े में सुकूनत गीर हो गया था। वाक्या-ए-करबला के मौके पर ये बिल-क्रस्द कहीं चला गया था और उसने किसी का साथ नही दिया। एक दिन ये इब्ने ज़ियाद से मिलने गया। इब्ने ज़ियाद ने पूछा कि तू कहाँ था ? उस ने जवाब दिया कि मैं अलील था, फिर इब्ने ज़ियाद ने दरयाफ्त किया कि तू हमारे दुश्मनों के साथ करबला में था उस ने अगर ऐसा होता तो उसके कुछ असरात होते ये बातें हो ही रही थीं कि इब्ने ज़ियाद किसी और तरफ मुतावज्जो हो गया अबीदुल्लाह इब्ने हुर्र घोड़े पर सवार होकर किसी तरफ चल दिया जब इब्ने ज़ियाद ने उसे न पाया तो उसे तलाश कराया अबीदुल्लाह इब्ने हुर्र को लोगो ने पा लिया और उससे कहा 'कि चलो इब्ने ज़ियाद ने बुलाया है' तो उस ने जवाब दिया कि 'मैं अपने इख़्तेयार से तो किसी तरह उसके पास न जाऊँगा।' फिर उसके बाद वह वहाँ से अपने लश्कर यानी हमराहियों समेत करबला को चला गया वहा पहुँच कर उस ने बेपनाह गिरया किया और सात शेरो पर मुश्तमिल एक मरसिया कहकर उसे करबला में पढ़ा और मदायन को चला गया उसके मरसिये का एक शेर यह है :-
व लौ अना अवासियाह वे-नफ्सी
लनलत करामता यौम-अल सलाक।
इस में कोई शक नही कि मैं अगर इमाम हुसैन अलै० कि आवाज़ पर लब्बैक कहकर उन की मदद के लिये गया होता तो ज़रूर कयामत के दिन बड़ी करामात का मालिक होता लेकिन अफसोस मैं उस शरफे ख़िदमत से महरूम रहा।
▪️हज़रते हुर की हयाते अबदी
जिस तरह तमाम शोहदा जिन्दा हैं उसी तरह से हज़रते हुर्र की ज़िन्दगी भी मुसल्लम है मिर्जा मोहम्मद हैदर शिकोह इब्ने मिर्ज़ा मोहम्मद काम बक्श इब्ने र्मिज़ा मोहम्मद सुलेमान शिकोह इब्ने शाहे आलम बादशाह देहली ने अपने रिसाला "इल्गे हैदरी" में लिखा है कि 804 हि० में ये मालूम करके हज़रते हुर्र के सरे मुबारक पर एक ऐसा रूमाल बधा हुआ है जो हज़रते कृतिमा ज़हरा स० का काता व बुना हुआ है। मैने चाहा कि कब्र खुदवा कर उसे निकाल लूँ लेकिन ओलमा ने इसकी इजाजत न दी मैं सख़्त रंजीदा था कि सय्यद मदनी मुल्ला हसन ने मुझसे कहा कि मदीने में एक ज़ैद हाशमी है उनके पास हजरते सय्यदा स० की बुनी हुई एक चादर है जिस पर बहुत से नक़्श और हर्फ उभरे हुऐ है मैंने कोशिश करके उसे हासिल कर लिया और उसे सर पर बाँध कर नजाते उखरवी का ज़रिया करार दिया हबीब-अल-सीर में है कि सन् 914 हि० में शाह इस्माईल सफ्वी ने हज़रत इमाम हुसैन अलै० हज़रते अब्बास अलै० और जनाबे हुर्र के रौज़ो की तजदीद व तरफीअ की अल्लामा नेमत-उल-अल्लाह जजायरी तहरीर फरमाते है। "इसी सन् 914 हि० में शाह अब्बास ने हज़रते हुर्र की कब्र खुदवा कर उन की लाशे मुतहर से वो रूमाल खोला जो इमाम हुसैन अलै० ने ब-वक़्ते शहादत उन के सर पर बांध दिया था। रूमाल का खोला जाना था कि सरे हुर्र से ख़ूने ताज़ा जारी हो गया ये देख कर रूमाल फौरन बंधवा दिया गया" ।
ख़ूने ताज़ा का जारी होना शहादत देता है कि हज़रते हुर्र भी हयाते अबदी के मालिक है जिस तरह तमाम शोहदा ज़िन्दा है उसी तरह ये भी वाई ज़िन्दगी से बहरावर हैं।
🔹अली इब्ने हुर्रे रियाही
आप हज़रते हुर्र इब्ने यज़ीद अल-रियाही के बेटे थे। आप का नाम अली था। हज़रत की शहादत के बाद आपके दिल में मोहब्बते पदरी ने जोश मारा आप की अक्ल ने जज़्बा-ऐ-शहादत को उभारा इमाम हुसैन अलै० की बेबसी और बेकसी ने दिल व दिमाग में इज़्तेराब पैदा कर दिया। बिल आखिर घोड़े को पानी पिलाने के बहाने से लश्कर इब्ने सअद को छोड़ निकले (काशफी)।
आप ने हज़रते हुर्रे शहीद के कदमों से अपनी आँखों को मला फिर आगे बढ़े और इमाम हुसैन अलै० के कदम बोस हुऐ इमामे मज़लूम ने इजाज़त दी और आप मैदान में नबर्दआज़मा हुऐ आप ने ऐसी जंग की कि दुश्मन हैरान रह गये बिल आखिर आप दुश्मनों को कत्ल करके शहीद हो गये।
📖72 तारे, अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम
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