असहाबे इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम और जन्नत में अपना मुक़ाम

♦️इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जन्नत दिखला दी हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम अपने असहाबे बावफ़ा का जाएज़ा लेने और पूरा पूरा इत्मिनान कर लेने के बाद अपने क़रीब बुलाते हैं और एक दफ़ा फिर फ़रमाते हैं कि तुम्हारी बातों से तौके बैयत उतारे लेता हूं। यह रात का पर्दा हाएल है इसे सिपर के काम में लाओ और अपनी जान बचा लो। यह दुश्मन तो सिर्फ मेरा खून चाहते हैं। जब मुझे क़त्ल कर लेंगे तो तुम्हारी तरफ़ रूख भी न करेंगे। वह बोले, ख़ुदा की कसम यह तो कभी न होगा।
  आपने फ़रमाया। जो कहता हूं उस पर गौर करो। कल तुम सब के सब ज़रूर क़त्ल कर दिये जाओगे और एक भी न बचेगा। अर्ज़ की अलहम्दो लिल्लाह कि हम आपके साथ शहीद होने से मुशर्रफ होंगे।

फिर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने असहाब को क़रीब बुलाया और फ़रमाया ज़रा सर तो उठाओ और देखो। उन्होंने सर उठाया और जन्नत में अपनी मंजिल और जगह देखी आप फ़रमाते जाते थे कि ऐ हबीब, ऐ ज़ुहैर वगैरा यह तुम्हारी जगह है यह तुम्हारी जगह है इसी तरह सब को दिखला दिया। उसे देखने के बाद हर शख़्स नैज़ों और तलवारों का अपने सीने और चेहरे से इस्तेक़बाल करने लगा। ताकि जल्द से जल्द जन्नत में दाखिल हो कर अपनी जगह पाये। (वसाएल मुज़फ़्फ़ी स० 393 तबअ तेहरान 1320 हिजरी)

हुसैनी बहादुरों में जोश शुजाअत पहले ही क्या कम था कि जन्नत भी अपनी आंखों से देख ली। मरने के पहले ही मुश्ताक थे। अब तो इश्तियाक हद से बढ़ गया दुनिया की तमाम कुलफतें मरने के मोहूम तकलीफें काफूर हो गयीं। अब वह आलम है कि एक दूसरे पर सबक्त कर रहा है और मसर्रते क़त्ल से फूले नहीं समाता। सब है:

शबे आशूर शैह ने खुतब-ए-आख़िर जो फ़रमाया 
न नींद आई किसी को रात भर शौके शहादत में

📝 ज़िकरुल अब्बास अलैहिस्सलाम अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 

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