कर्बला के तीसरे शहीद

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हज़रते नईम इब्ने अजलान अन्सारी अलैहिस्सलाम 

आप क़बीला ख़ज़रज के चश्मों चराग थे। आप के दो भाई और थे। एक का नाम नज़र और दूसरे का नाम नोमान था ये तीनो भाई अमीरुल मोमिनीन हज़रते अली अलै० के असहाब में से थे। इन लोगो ने जंगे सिफ़्फ़ीन में बड़ी जवाँ मर्दी का सबूत दिया था शुजाअत उन के घर की लौंडी थी ये शायर भी थे। नज़र और नोमान वाक्या-ए-करबला से पहले वफात पा चुके थे। और नईम जंगे करबला में शरीक हुऐ।

नईम का शुमार हुसैनी वफादारों में था आपको जब पता चला कि फर्ज़न्दे रसूल इमाम हुसैन अलै० आज़िमे इराक़ हैं तो आप कूफ़े से निकलकर हज़ की ख़िदमत में आहाज़िर हुए और आशुरे के दिन पहले हमले में शहीद हो गये।

📝72 तारे, अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम 

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