शबे आशूर इमामे हुसैन अलैहिस्सलाम का ख़ुत्बा

🔰हज़रत इमाम हुसैन का एक और ख़ुत्बा 

रात का एक हिस्सा गुज़र चुका है और तारीकी छा चुकी है।

इमाम अलैहिस्सलाम ख़ेमे से बरामद हो कर अपने असहाब के क़रीब जाते हैं, और उनके फिर मजतमा होने का हुक्म फ़रमाते हैं। आने वाहिद में असहाबे बावफ़ा मौजूद होते हैं (📚नासिखुल तवारीख जिल्द 6 स0 247) आप साज की कुर्सी पर जलवा अफ़रोज़ हो कर अपने असहाब से बादीदा पुरनम फ़रमाते हैं। (📝रौज़तुल शोहदा स० 309)

मेरे वफ़ादार असहाब मैंने तुम से बारे बैअत उठा लिया तुम अपने क़बीलों और अज़ीज़ों दोस्तों में जा मिलो। फिर अपने अहलेबैत अ० की तरफ़ मुतावज्जेह हो कर फ़रमाने लगे। मैं तुम्हें अपनी जुदाई के मुताल्लिक मशविरा देता हूं। इस लिये कि तुम दुश्मनों की कसरत ओर ताक़त की ताब न ला सकोगे और देखो दुश्मन सिर्फ मुझी को चाहते हैं तुम मुझे दुश्मनों में छोड़ कर चले जाओ बेशक ख़ुदा मेरी मदद करेगा और हमारे आबाओ अजदाद की तरह हम पर नज़रे मरहमत रखेगा। (📚दमअतुस्साकेबा स० 325 व नासेखुत्तवारीख़ जिल्द 6 स0 247)

इस ख़ुत्बे के बाद भी जॉबाजों ने दिलेराना जवाब दिया।
📝ज़िकरुल अब्बास अलैहिस्सलाम 

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