हज़रते अब्बास अलैहिस्सलाम का मदफ़न
हज़रत अब्बास अलैहिस्सलाम का मदफिन
अल्लामा शेख फखरूद्दीन इब्ने अहमद बिन अली बिन अहमद बिन तरीह अल नजफी तहरीर फरमाते हैं, हज़रत अब्बास अ० तमाम शोहदा से अलाहिदा पहाड़ी के करीब मकामे कत्ल पर दफ्न किये गये हैं। जहां आज भी उनकी कब्र मौजूद है। (मुन्तख़ब शेख तरीही मजलिस 2 स0 22 तबअ मुम्बई 1308 हिजरी)
अल्लामा मोहम्मद बाक़िर मजलिसी तहरीर फरमाते हैं बनी असद ने हज़रत अब्बास अ० गाजिरया के रास्ते में उसी जगह दफ्न किया है जहां आज भी उनकी कब्र मौजूद है।
(बिहारूल अनवार जिल्द 10 स0 242, आलामुल वुरा स0 147, यही कुछ किताब इरशाद शेख मुफीद, अबसारूल ऐन स0 127, तोहफए हुसैनिया जिल्द एक स० 187, नूरूल ऐन 45, हिदायतुल जायरीन शेख अब्बास कुम्मी स0 110, अनवारे नेमानिया स0 344, उमरतुल मतालिब स० 349, रियाजुल एहज़ान स० 39, किफायतुल तालिब स० 298, और कामिल बहाई सैरायर इब्ने इदरीस यहिया लौलामा हल्ली मीज़ार दरदिस शहीद अव्वल शरह इरशाद अर्दबेली मिसबाहुल फकीहा रज़ा हवानी में है और अबू मोखन्नफ के अलावा और अहले मकातिल ने लिखा है कि जनाबे अब्बास ० के अलाहिदा दफ्न करने की वजह यह हुई कि आप की लाश पारा पारा होने की वजह से उठ नहीं सकती थी और इसी वजह से हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम भी जनाबे अब्बास की लाश उस मकाम पर नहीं ला सके, जहां आप ने अपने खेमे के रूबरू सब शहीदों की लाशें जमा कर दी थीं। (📚तर्जुमा अबसारूल ऐन स० 198 तबअ हैदराबाद)
📝 ज़िकरूल अब्बास अलैहिस्सलाम
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