कर्बला के 14वें शहीद
कर्बला के चौदहवें शहीद हज़रते मुजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह अल-आन्दी
आपका पूरा नाम मजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने मजमा इब्ने मालिक इब्ने आयास इब्ने अब्द मनात इब्ने अबीदुल्लाह इब्ने सअद अल-अशीरा अल-मज़हजी कही आन्दी था। आप किबला मज़हज एक नुमाया मर्द थे आपके वालिद अब्दुल्लाह इब्ने मुजमाअ सहाबी-ए-रसूल थे और अहदे रिसालत में अच्छी हैसियत के मालिक थे। लोगो की निगाह में आपकी बड़ी इज़्ज़त थी। खुद मुजमाअ का शुमार ताबईन में था और आप को अमीरूल मोमिनीन के साहाबी होने का शरफ हासिल था। मकाम अज़ीब हजानात में जिन लोगो को हुर्र ने इमाम हुसैन अ० के साथ होने से रोका था।
उन में आप भी थे। आप ही से इमाम हुसैन अलै० ने अहले कूफा के हालात अजीब में दरयाफ्त फ्रमाये थे और उन्ही अब्दुल्लाह ने अर्ज की थी कि, मौला ! कूफे के जितने रईस-ओ-सरदार है सब को इब्ने ज़्याद ने डरा धमका कर और रूपये देकर आप के खिलाफ कर दिया है सब आप से लड़ने को तय्यार है। और ऐ मौला ! यही हाल गुरबा का भी है उन के दिल अगर चें आपके साथ है लेकिन उनकी तलवारें आपकी हिमायत में नही है। फिर आपने अपने कासिदे कैस इब्ने मसहर के मुताल्लिक फ्रमाया कि मैंने अहले कूफा के नाम उन के ज़रिये से आख़िरी ख़त इरसाल किया है। मुजमाअ ने आबदीदा हो कर जवाब दिया मौला ! उन्हें हसीन बिन नमीर ने गिरफ्तार कर के इब्ने ज़्याद के सामने पेश कर दिया था और वह हुक्मे इब्ने ज़्याद से शहीद कर दिये गये। अल-ग़ज़ जनाबे मुजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह इमाम हुसैन अलै० के साथ रहे और यौमे आशूरा जंगे मगलूबा में शहीद हो गयें। कुछ रिवायतों की बिना पर आपके बेटे आएज़ इब्ने मुजमाअ भी आप के हमराह आये थे और आप ही के साथ शहीद हुए। मेरी तहकीक के मुताबिक मुजमाअ और उन के चन्द साथी मसलन उमर इब्ने खालिद जनादः वगैरा उस वक़्त कूफ़े से निकल कर करबला पहुँचे थे, जब जनाबे मुस्लिम को शहीद कर दिया गया था।
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