कर्बला के 21वें शहीद
कर्बला के 21वें शहीद हज़रते ज़हिर इब्ने उमर अल-कन्दी
आप जनाब उमर इब्ने अल हमक अमीरुल मोमिनीन के मशहूर सहाबी के हर वक़्त साथ रहा करते थे एक मर्तबा ज़ियाद इब्ने अबी और उमर इब्ने अल हमक में हज़रत अली के बारे में सख़्त इख़्तेलाफ हो गया जिस के नतीजे में उसने आपको माविया के हवाले कर दिया और उसने उन्हे कत्ल कर दिया जब आप माविया के पास पहुँचे थे आपके हमराह ये ज़ाहिर कृन्दी भी थे। माविया ने उन्हे कत्ल नही किया।
आप आले मोहम्मद की मोहब्बत में निहायत शोहरत रखते थे। एक ज़बरदस्त पहलवान और पुख़्ताकार बहादुर की हैसियत से मशहूर थे। 60 हिजरी में आप हज के लिये मक्का-ऐ-मोअज़्ज़मा पहुँचे और इमाम हुसैन अ० के हमराह करबला आये आप के पोतो ने मोहम्मद बिन सनान इमाम रज़ा और इमाम मोहम्मद तकी अलै० से हदीस के रावी गुज़रे हैं मोहम्मद इब्ने सन्नान की वफात सन् 220 हिजरी में हुई है।
ज़ाहिर कन्दी मक्का से करबला तक इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत करते रहे और सुबहे आशूर हमल-ऐ -अव्वल में शहीद हो गये।
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